सीतापुर , मई 25 -- उत्तर प्रदेश सरकार अयोध्या, काशी और मथुरा के विकास के बाद अब नैमिषारण्य को प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। इसी क्रम में लखनऊ-सीतापुर मार्ग पर वैदिक थीम आधारित भव्य तोरण द्वारों का निर्माण कराया जाएगा। लगभग 3.85 करोड़ रुपये लागत वाली इस परियोजना के लिए प्रथम चरण में 2.40 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं।

प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने सोमवार को बताया कि प्रस्तावित तोरण द्वार केवल प्रवेश द्वार नहीं होंगे, बल्कि नैमिषारण्य की आध्यात्मिक गरिमा और सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक के रूप में स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि परियोजना की रूपरेखा तैयार करते समय शहरी और प्राकृतिक परिवेश का विशेष ध्यान रखा गया है। तोरण द्वारों को सड़क से पर्याप्त दूरी पर बनाया जाएगा ताकि उनकी भव्यता दूर से ही दिखाई दे और श्रद्धालु सहज रूप से आस्था व्यक्त कर सकें।

उन्होंने बताया कि चारों ओर हरियाली और खुले वातावरण के बीच यह संरचना एक सांस्कृतिक लैंडमार्क के रूप में विकसित होगी। विशेषज्ञों के अनुसार यह तोरण द्वार भविष्य में नैमिषारण्य की नई पहचान बनेंगे और वैदिक संस्कृति, भारतीय वास्तुकला तथा आध्यात्मिक पर्यटन के संगम के रूप में देश-दुनिया के श्रद्धालुओं को आकर्षित करेंगे।

जयवीर सिंह ने कहा कि परियोजना का उद्देश्य केवल सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि नैमिषारण्य को मजबूत धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान प्रदान करना भी है। वर्तमान में तीर्थ क्षेत्र के प्रवेश मार्गों पर कोई विशेष पहचान चिह्न नहीं है। ऐसे में ये भव्य तोरण द्वार श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक स्वागत द्वार का कार्य करेंगे। साथ ही धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देकर स्थानीय व्यापार, रोजगार और सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

उन्होंने बताया कि तोरण द्वारों का निर्माण लाल बलुआ पत्थर जैसी फिनिश के साथ किया जाएगा, जो भारतीय धार्मिक स्थापत्य कला में ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण सामग्री मानी जाती है। इसका प्राकृतिक मिट्टी जैसा रंग पूरे परिसर को पारंपरिक और आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान करेगा।

परियोजना में नागर शैली की वास्तुकला अपनाई जाएगी, जिसकी विशेषता बारीक नक्काशी, ऊर्ध्वाकार संरचना, पवित्र ज्यामिति और प्राचीन मंदिर शैली होती है। डिजाइन में वैदिक वास्तुकला के तत्वों और स्थानीय सांस्कृतिक स्वरूप का समावेश किया गया है, ताकि यह निर्माण धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक गौरव का भी प्रतीक बन सके।

पर्यटन मंत्री ने कहा कि चौकोर चबूतरों, पतले स्तंभों, मंदिरनुमा संरचनाओं और पत्थर की भव्य कारीगरी से युक्त ये तोरण द्वार नैमिषारण्य को नई पहचान देंगे। वैदिक वास्तुकला और प्राकृतिक सौंदर्य का यह समन्वय आने वाले समय में नैमिषारण्य को देश के प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों में और अधिक प्रतिष्ठा दिलाएगा।

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