नैनीताल , फरवरी 27 -- उत्तराखंड की सरोवर नगरी नैनीताल में नाबालिग के दुष्कर्म के आरोपी 72 वर्षीय ठेकेदार उस्मान खान को उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिली है। उच्च न्यायालय ने आरोपी के जमानत प्रार्थना पत्र को शुक्रवार को खारिज कर दिया।
आरोपी के जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई पूरी करने के बाद न्यायमूर्ति आलोक महरा की पीठ ने विगत 24 फरवरी निर्णय सुरक्षित रख लिया था। आज सुबह अपना निर्णय जारी किया। अदालत ने सरकार को आरोपी के खिलाफ तीन महीने में ट्रायल पूरी करने को कहा है।
आरोपी की ओर से सुनवाई के दौरान कहा गया कि वह निर्दोष है और उस पर बेबुनियाद आरोप लगाये गये हैं। उसे साजिशन फंसाया गया है। आगे कहा गया कि पीड़िता और उसके परिजनों के बयानों में भारी विरोधाभास है। मेडिकल रिपोर्ट में भी दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई है।
वहीं सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि 12 साल की पीड़िता के साथ दो बार यौन शोषण की घटना हुई है। आरोपी के जमानत देना उचित नहीं है। साथ ही कहा गया कि निचली अदालत में आरोपपत्र दायर कर दिया गया है। पीड़िता और उसकी बहन के बयान पूरे हो गये हैं जबकि मां के बयान होने अभी बाकी हैं। ऐसे में जमानत देना उचित नहीं है।
अंत में पीठ ने जमानत प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया और सरकार को निचली अदालत में जल्द सुनवाई पूरी करने के निर्देश दे दिए।
उल्लेखनीय है कि नैनीताल के मल्लीताल में पिछले साल 30 अप्रैल को एक 12 साल की नाबालिग के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया था। यौन शोषण का आरोप 72 साल के ठेकेदार उस्मान खान पर लगाया गया था। आरोप है कि पैसे का लालच देकर पीड़िता का दो बार यौन शोषण किया गया।
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