नैनीताल , जनवरी 22 -- उत्तराखंड के नैनीताल जिले में फीस वृद्धि, किताब-यूनिफॉर्म खरीदने के मामले में जिला प्रशासन ने निजी विद्यालयों पर सख्ती की है।
जिला प्रशासन ने गुरुवार को निर्देश दिया कि अभिभावकों को किसी विशेष दुकान या प्रकाशन की पुस्तक और यूनीफार्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है।
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के अनुसार, पाठ्य पुस्तकों और यूनीफार्म खरीद मामले में निजी स्कूलों की कुछ शिकायतें मिल रही हैं। आरोप लगाया गया है कि स्कूलों द्वारा व्यावसायिक व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत शिक्षा एक परोपकारी गतिविधि है और इसे लाभ कमाने का साधन नहीं बनाया जा सकता।
इस संबंध में समय समय पर न्यायालय भी स्पष्ट निर्देश दे चुके हैं कि विद्यालय अभिभावकों को किसी विशेष दुकान अथवा प्रकाशन से पुस्तक या यूनिफार्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है।
उन्होंने निर्देश दिए कि उत्तराखण्ड शासन के निर्देशों के तहत एनसीईआरटी, एससीईआरटी पुस्तकों को प्राथमिकता दी जाए। फीस वृद्धि पारदर्शी, औचित्यपूर्ण एवं अभिभावकों से संवाद के बाद ही किया जाए।
उन्होंने मुख्य शिक्षाधिकारी को निर्देश दिये कि वह सुनिश्चित करें कि निजी विद्यालय बिना ठोस कारण और अभिभावक/विद्यालय प्रबंध समिति (एसएमसी) से परामर्श के बिना शुल्क वृद्धि न करें और न ही किसी विशेष दुकान या विक्रेता से यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य करें। उन्होंने निर्देश दिए कि यूनिफार्म का स्वरूप ऐसा होना चाहिए जो सामान्य बाजार में आसानी से मिल सके, अनावश्यक रूप से बार-बार यूनिफॉर्म में परिवर्तन नहीं किया जाये।
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