नैनीताल , सितंबर 16 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नैनीताल से सटे खुर्पाताल और सरिता ताल की दयनीय स्थिति को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्याय मित्र अधिवक्ता (कोर्ट कमिश्नर) को ताजा रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने पंकज मिगलानी की ओर से दायर जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई की।

इस दौरान नैनीताल-कालाढूंगी मार्ग पर फूड वैन, दुकानों, होम स्टे एवं होटलों से निकलने वाले प्लास्टिक कचरे से जंगल तथा जल स्रोतों को होने वाले नुकसान को लेकर सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान नैनीताल नगर पालिका की ओर से खंडपीठ को अवगत कराया गया कि प्रशासन ने कोर्ट के आदेश का पूरी तरह अनुपालन करते हुए अतिक्रमण हटा दिया है। इसके जवाब में न्यायमित्र अधिवक्ता संदीप तिवारी ने बताया कि अभी स्थिति जैसी है। उन्होंने खंडपीठ के समक्ष ताजा फोटोग्राफ भी पेश किये।

खंडपीठ ने इस पर नाराज़गी व्यक्त करते हुए कोर्ट कमिश्नर को दोबारा निरीक्षण कर ताजा रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

खंडपीठ ने फूड वैन एवं अन्य दुकान संचालकों को हटाने की चेतावनी भी दी। कहा कि यदि गंदगी फैलाई गई तो उन्हें बंद करने के आदेश जारी किए जाएंगे। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि यह क्षेत्र जल संक्रमण की चपेट में है।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि सरिता ताल और खुर्पाताल की स्थिति प्रदूषण के चलते काफी दयनीय है। नैनीताल- कालाढूंगी मार्ग पर संचालित फूड वैन, फड़-खोखों, दुकानों, होटलों एवं होम स्टे से निकलने वाला कचरा जंगल व जल स्रोतों में डाला जा रहा है, जिससे सड़ियाताल, खुर्पाताल सहित अन्य जल निकाय प्रभावित हो रहे हैं और स्थानीय लोगों तथा जानवरों को प्रदूषित पानी पीना पड़ रहा है।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि होटल व होम स्टे संचालक पीसीबी के मानकों को पूरा किए बिना सीवरेज खुले में बहा रहे हैं। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि इन्हें संचालन की अनुमति तभी दी जाए जब वे पीसीबी और हाईकोर्ट द्वारा निर्धारित मानकों व दिशा-निर्देशों का पालन करें।

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