शिलांग , दिसंबर 15 -- मेघालय के उत्तर-पूर्वी पर्वतीय विश्वविद्यालय (नेहु) ने सेमीकंडक्टर मिशन के तहत स्वदेशी नवाचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एक नवीन स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप विकसित की है।

एक अधिकारी ने सोमवार को बताया कि इस चिप का उद्देश्य रेड स्पाइडर माइट (आरएमएस) को भगाना है जो पूर्वोत्तर और भारत के अन्य चाय उत्पादक क्षेत्रों में चाय बागानों को प्रभावित करने वाले सबसे विनाशकारी कीटों में से एक है।

नेहू के इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियरिंग विभाग के पंकज सरकार, सुशांत कबीर दत्त, संगीता दास और भैस्वज्योती लाहोन की टीम ने इस चिप को प्रौद्योगिकी-संचालित और पर्यावरण-अनुकूल समाधान के रूप में डिज़ाइन किया है।

इस चिप की संकल्पना, डिज़ाइन और विकास नेहू में किया गया था और इसका निर्माण मोहाली स्थित सेमीकंडक्टर लेबोरेटरी (एससीएल) में किया गया था। जबकि केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने औपचारिक रूप से इसे 28 नवंबर को प्रस्तुत किया था।

अधिकारी ने कहा, "यह सहयोग शैक्षणिक संस्थानों और राष्ट्रीय निर्माण सुविधाओं के बीच प्रभावी तालमेल का उदाहरण है, जो इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करता है।"उल्लेखनीय है कि रेड स्पाइडर माइट चाय की उपज और उसकी गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित करता है, जो चाय उद्योग के लिए एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा, "नयी विकसित चिप से रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है, जो एक टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल विकल्प प्रदान करती है और जिससे चाय उत्पादकों को लाभ होगा एवं पारिस्थितिक संतुलन को बढ़ावा मिलेगा।"नेहू अधिकारियों ने उल्लेख किया कि यह नवाचार 'मेक इन इंडिया' के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता और अत्याधुनिक अनुसंधान के माध्यम से 'क्षेत्र-विशिष्ट चुनौतियों का समाधान करने' के अनुरूप है। चिप का व्यावहारिक आकलन करने के लिए आगे क्षेत्र-स्तर पर परीक्षण और सत्यापन की योजना बनाई गयी है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित