काठमांडू , अगस्त 26 -- नेपाल के रसुवा और पड़ोसी जिलों में बुधवार को भोटे कोशी नदी में आयी अचानक बाढ़ की चपेट में कई बस्तियां आ गयीं और इस आपदा में कम से कम 31 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 384 लोग लापता हैं।

नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, लापता या संपर्क से बाहर बताये गये लोगों में 291 विदेशी नागरिक और 32 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। बाढ़ के कारण घरों, पुलों, बाजारों और अन्य बुनियादी ढांचों को भारी नुकसान पहुंचा है। रसुवा और नुवाकोट जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, जहां नदी किनारे बसी बस्तियों को बाढ़ की सबसे भीषण मार झेलनी पड़ी है।

नुवाकोट के सहायक प्रमुख जिलाधिकारी कृष्ण प्रसाद हुमागाईं ने बताया कि पूरी की पूरी बस्तियां तबाह हो गयी हैं, जबकि बैंकों, पुलों और बाजारों को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने इस तबाही को अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि 10 से अधिक कंक्रीट के पुल बह गये हैं। प्रभावित इलाकों में खोज एवं बचाव दल तैनात किये गये हैं, लेकिन भारी बारिश, खराब मौसम और संचार व्यवस्था ठप होने के कारण अभियानों में बाधा आ रही है।

परियोजना के प्रमोटर विजय मोहन भट्टराई ने बताया कि 20 मेगावाट की लांगतांग खोला जलविद्युत परियोजना से जुड़े 60 लोग अब भी लापता हैं। इनमें 25 इंजीनियर, ड्राइवर और रसोई कर्मचारी शामिल हैं, जबकि 35 मजदूर उस समय सुरंग के अंदर थे, जब बुधवार सुबह बाढ़ आयी थी। उन्होंने कहा, "हम अब तक उनसे संपर्क नहीं कर पाये हैं।" उन्होंने बताया कि जलविद्युत परियोजना का काम पूरा हो चुका था और दो दिनों के भीतर इसका परीक्षण शुरू होना था।

तिमुरे स्थित रसुवा सीमा शुल्क कार्यालय के सीमा शुल्क प्रमुख राजेंद्र ढुंगाना के अनुसार, वहां के अन्य 15 कर्मचारी भी लापता हैं।

नेपाली सेना के प्रवक्ता राजाराम बस्नेत ने बताया कि सेना ने बाढ़ में फंसे 88 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। बचाये गये लोगों में से 13 को काठमांडू के त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि अन्य को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है। उन्होंने बताया कि कुछ घायलों का इलाज त्रिशूली कैंप में किया जा रहा है। बचाव कार्यों के लिए 12 हेलीकॉप्टरों को लगाया गया है, जिनमें चार नेपाली सेना के और अन्य निजी ऑपरेटरों के हैं। खराब मौसम के कारण हालांकि उड़ानों में बार-बार बाधा आ रही है।

त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बचाव समन्वय केंद्र ने बताया कि काठमांडू से रसुवा के बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए 29 निजी और छह सैन्य हेलीकॉप्टरों की उड़ानें संचालित की गयी। इनमें से 23 निजी और दो सैन्य हेलीकॉप्टर घायलों को लेकर वापस लौटे। वहीं रसुवा में बचाव एवं राहत सामग्री ले जा रहे तीन हेलीकॉप्टरों को खराब मौसम के कारण वापस लौटने पर मजबूर होना पड़ा।

गृह मंत्री सूडान गुरुंग और संस्कृति, पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री खड़क राज पौडेल काठमांडू से राहत एवं बचाव उड़ानों का समन्वय कर रहे हैं।

सरकार ने रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग की बाढ़ प्रभावित नगरपालिकाओं को आपदा संकटग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिया है, जिससे आपातकालीन राहत और बचाव उपायों को तेजी से लागू करने में मदद मिलेगी।

विश्व बैंक ने भी आपातकालीन सहायता की पेशकश की है, जबकि पड़ोसी देश भारत-चीन ने नेपाल के राहत प्रयासों में मदद के लिए कदम उठाये हैं।

अर्थ मंत्री स्वर्णिम वागले ने कहा कि सरकार सहायता के बेहतर समन्वय और समय पर वितरण को सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ विचार-विमर्श कर रही है।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि ऊपरी क्षेत्र में हिमस्खलन (एवलांच) के कारण नदी का बहाव अस्थायी रूप से रुक गया होगा, जिसके बाद अचानक पानी छूटने से यह विनाशकारी बाढ़ आयी। अभी तक हालांकि इसके कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसके लिए विस्तृत डेटा की आवश्यकता है।

इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (आईसीआईएमओडी) के आपदा जोखिम न्यूनीकरण विशेषज्ञ शाश्वत सान्याल ने बताया कि लेंडे नदी में पिछले 14 महीनों में दो बार भीषण बाढ़ आ चुकी है।

आईसीआईएमओडी के जलवायु एवं पर्यावरण जोखिम प्रमुख क्यांगगोंग झांग ने कहा कि जो क्षेत्र पिछले वर्ष बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुआ था, उसे एक बार फिर गंभीर नुकसान पहुंचा है।

श्री झांग ने नेपाल-चीन सीमा के पास ऊपरी क्षेत्रों में अब भी रुकावटें होने की आशंका जताते हुए बाढ़ की एक और लहर आने की चेतावनी दी है।प्रशासन का मुख्य ध्यान लापता लोगों की तलाश करने, फंसे लोगों को बाहर निकालने और सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में रास्तों व संचार व्यवस्था को बहाल करने पर केंद्रित है।

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