बलरामपुर , अप्रैल 22 -- पड़ोसी राष्ट्र नेपाल की शाह सरकार द्वारा भारतीय सामानों पर सीमा शुल्क बढ़ाने के साथ सख्त रवैये से देवीपाटन मंडल के सीमावर्ती बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
मंडल के तीनों जिलों बलरामपुर की 94.5 किलोमीटर,बहराइच की 98.5 किलोमीटर और श्रावस्ती की 51 किलोमीटर को मिलाकर कुल 243 किलोमीटर खुली नेपाल सीमायें है l इनमें बहराइच के रुपईडीहा और बलरामपुर जिले का बढ़नी बार्डर शामिल है। मंडल के तीनों नेपाल सीमावर्ती जिलों का एक बड़ा भाग नेपाल से सटा होने के कारण रुपईडीहा,बढ़नी,जरवा,पचपेड़वा,गैसडी,तुलसीपुर,जैतपुर,मिहिपुरवा,नानपारा समेत करीब दर्जन भर से अधिक बाजारों का व्यापार नेपाल से आने वाले ग्राहकों पर निर्भर है।
दरअसल,नेपाल के अंदर की बाजारें भी भारतीय सामानों से चलती है लेकिन वर्तमान समय में सत्ता परिवर्तन के बाद आयीं बालेंद्र सरकार ने जिस प्रकार भारतीय बाजारों से खरीद किये जाने वाले 100 रुपये से ऊपर के सामानों पर टैक्स (भंसार) बढ़ा दिया है ऐसे हालात में नेपाली दुकानदारों व नेपाली इलाकों में रह रहे वाशिंदों का सीमापार कर सामान खरीदना काफी महंगा पड़ने के कारण दूभर हो गया है।
भारतीय बाजार रुपईडीहा की दुकानदार सीमा बताती है कि अगर कोई नेपाली ग्राहक 110 रुपये बंडल बिस्किट खरीदता है और उसे नियमतः नेपाल बार्डर से उस पार ले जाता है तो उसे 120 रुपये नेपाली भन्सार देना पड़ रहा है जिससे बिस्किट की कीमत बहुत अधिक हो जाने से उसे काफी कठिनाई होती है। इसका परिणाम ये निकल रहा कि भारतीय बाजारों से अब नेपाली मूल के लोग सामान खरीदने से कतरा रहें है। बाजारों में रोजमर्रा के सामानों तक की खरीद- फिरोख्त न गति रुकने से अधिकतर दुकानदार अपने शटर गिराकर नेपाली सरकार के रियायती फरमान का इंतजार करने लगे है।
हालांकि भंसार बढ़ाने के कारण नेपाल सरकार को राजस्व अधिक मिलने के बजाय उनका दांव उल्टा भी पड़ता नजर आने लगा है। इसका मुख्य कारण सीमा से लगी पगडंडियां,जंगली व दुर्गम मार्ग है जो कुरियरों के लिये तस्करी का साधन व चोरी छिपे सामानों को नेपाली बाजारों में बगैर टैक्स और चेकिंग के तस्करी कर उस पार माल पहुंचाकर जहां एक ओर नेपाल सरकार को चूना लगा रहे वही दूसरी ओर मुनाफाखोरी भी कर रहे। तस्करी तो एक तरफ बल्कि दूसरी ओर नेपाल के युवक -युवतियां जहां एक ओर नेपाली क्षेत्रों में सरकार के निर्णय के विरोध में प्रदर्शन कर रहें वही निजी गाड़ियों में सस्ते तेल (डीजल-पेट्रोल) के चक्कर में बार्डर एरिया के पम्पों पर लंबी लाइनों में लगे नजर आने लगे है।
एसएसबी सूत्रों के अनुसार,सीमा पर प्रदर्शन व तस्करी के मद्देनजर चौकसी कड़ी कर दी गयी है।
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