दरभंगा , अप्रैल 24 -- ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के पूर्व कुलपति प्रो. सुरेन्द्र मोहन झा ने कहा कि "नेचुरल डेमोक्रेसी" केवल एक विचार नहीं, बल्कि भविष्य की अनिवार्य वैचारिक दिशा है, जिसके माध्यम से प्रकृति को पुनः शासन, नीति-निर्माण एवं सामाजिक संरचना के केन्द्र में स्थापित किया जा सकता है।
पूर्व कुलपति प्रोफेसर झा ने पृथ्वी दिवस के अवसर पर स्नातकोत्तर भूगोल विभाग एवं वर्ल्ड नेचुरल डेमोक्रेसी के संयुक्त तत्वावधान में विभाग में आयोजित उच्च स्तरीय, विचारोत्तेजक एवं ऐतिहासिक महत्त्व के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान मानव विकास मॉडल ने प्रकृति के साथ गंभीर असंतुलन उत्पन्न कर दिया है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी दिवस हमें याद दिलाता है कि पृथ्वी केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि हमारा साझा घर है। यदि प्रकृति सुरक्षित रहेगी, तभी मानव सभ्यता सुरक्षित रह सकेगी। इसलिए "नेचुरल डेमोक्रेसी" वास्तव में भविष्य की ऐसी सोच है, जिसमें लोकतंत्र केवल मनुष्यों तक सीमित न रहकर संपूर्ण प्रकृति के हित को भी महत्व देता है।
श्री झा ने कहा कि "नेचुरल डेमोक्रेसी" केवल एक विचार नहीं, बल्कि भविष्य की अनिवार्य वैचारिक दिशा है। उन्होंने कहा कि आज जब विश्व जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, जल संकट और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, तब आवश्यकता है कि प्रकृति को पुनः शासन, नीति-निर्माण एवं सामाजिक संरचना के केंद्र में स्थापित किया जाए।
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