उन्नाव , अप्रैल 02 -- उन्नाव विकास प्राधिकरण द्वारा निष्प्रयोज्य वाहन की नीलामी के बाद भी आवंटी के हवाले करने की प्रक्रिया में हीलाहवाली करने और मामले को करीब छह महीने से लटकाये रखने का मामला प्रकाश में आया है।
दरअसल, पिछले साल जून में उन्नाव शुक्लागंज विकास प्राधिकरण ने एक चार पहिया निष्प्रयोज्य वाहन की नीलामी के लिये पंजीकरण प्रक्रिया शुरु की थी और इसके लिये इच्छुक आवेदकों से पंजीकरण शुल्क के तौर पर 45-45 हजार रुपये जमा कराये गये थे। इस वाहन की नीलामी प्राधिकरण के सचिव की देखरेख में 18 नवंबर 2025 को मोतीनगर स्थित प्राधिकरण में की गयी और उक्त वाहन नीलामी में कानपुर के घाटमपुर कस्बा निवासी अमित कुमार के पक्ष में गया।
पीड़ित अमित कुमार की शिकायत है कि उनके पक्ष में फैसला आने के बावजूद प्राधिकरण के अधिकारी उन्हे वाहन देने में आनाकानी कर रहे है और दवाब बना रहे हैं कि वह वाहन को सरेंडर कर दें ताकि जिलाधिकारी कार्यालय में तैनात एक कर्मचारी को उक्त वाहन दिया जा सके जिसे पाने को वह लालयित है। अमित कुमार ने इसका विरोध किया तो अधिकारियों ने उन्हे टरकाना शुरु कर दिया। पीड़ित ने सूचना के अधिकार के तहत वाहन देने की प्रक्रिया में विलंब का कारण पूछा तो उन्हे बताया गया कि पूरा शुल्क जमा नहीं किया गया है जिसकी प्रक्रिया जारी है।
दूसरी ओर एक अन्य आवेदक घाटमपुर निवासी संदीप निगम की शिकायत है कि उन्होने वाहन आवंटित न होने की दशा में नियम के अनुसार पंजीकरण वापसी का आवेदन किया तो उन्हे 45 हजार रुपये की वापसी के एवज में रिश्वत मांगी गयी। इसके लिये उन्होने संबंधित अधिकारियों और उचित प्लेटफार्म के जरिये रिश्वत मांगे जाने की शिकायत की मगर नतीजा सिफर रहा।
इस बारे में प्राधिकरण के सचिव शुभम यादव का कहना है कि नीलाम किया गया वाहन तय शर्तो को पूरा करने की दशा में आवंटी अमित कुमार को ही मिलेगा जिसका प्रक्रिया चल रही है , हालांकि प्रक्रिया में छह माह से अधिक का समय लगने के बावजूद अटके रहने के सवाल का जवाब उनके पास नहीं था।
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