पटना, अप्रैल 18 -- जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने शनिवार को कहा कि बिहार में महिलाओं के सशक्तिकरण की जो नींव पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लगभग दो दशक पहले रखी थी, वह पूरे देश में एक मिसाल बन चुकी है।
श्री प्रसाद ने कहा कि वर्ष 2006 में पंचायतों में तथा 2007 में नगर निकायों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का ऐतिहासिक निर्णय उस समय लिया गया, जब इस विषय पर राष्ट्रीय स्तर पर ठोस राजनीतिक सहमति का अभाव था।
जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि श्री कुमार की इस दूरदर्शी पहल का परिणाम आज स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। बिहार में हजारों महिलाएं पंचायतों और नगर निकायों में शीर्ष पदों पर आसीन होकर न केवल नेतृत्व कर रही हैं, बल्कि समाज के विकास में सक्रिय और प्रभावी भूमिका भी निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि यह बदलाव केवल प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सामाजिक सोच और महिलाओं की भागीदारी को भी नई दिशा दी है।
श्री प्रसाद ने लोकसभा में कांग्रेस एवं विपक्षी दलों के असहयोग की चर्चा करते हुए कहा कि महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने में सहयोग नहीं कर कांग्रेस ने बड़ी राजनीतिक भूल की है। उन्होंने कहा कि उन्हें कांग्रेस के रवैया से उन्हें कोई आश्चर्य नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को राजनीति में उचित भागीदारी का विरोध कांग्रेस की पुरानी परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि इस बार महिला आरक्षण विधेयक को पास कराने में मदद कर कांग्रेस प्रायश्चित कर सकती थी लेकिन कांग्रेस ने एक सुनहरा मौका गंवा दिया है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के साथ विपक्षी पार्टियों ने भी महिला आरक्षण विधेयक का विरोध कर जो ऐतिहासिक भूल की है, उसे इस देश की महिलाएं लंबे समय तक याद रखेंगी। कांग्रेस एवं विपक्षी दलों का ये फैसला भविष्य में उनके लिए राजनीतिक तौर पर आत्मघाती साबित होगा।
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