चंडीगढ़ , मार्च 13 -- पंजाब के पूर्व शिक्षा मंत्री एवं विधायक परगट सिंह ने शुक्रवार को नीति आयोग की एक रिपोर्ट में राज्य की खराब वित्तीय स्थितिका हवाला देते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 'रंगला पंजाब' बनाने की बात करने वाली आम आदमी पार्टी (आप) सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान को राज्य की खराब वित्तीय स्थिति पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और लोगों से माफी मांगनी चाहिए।
श्री सिंह ने मांग की कि बिगड़ती कानून-व्यवस्था के साथ-साथ सरकार बिगड़ती आर्थिक स्थिति को स्वीकार करे और विधानसभा में श्वेत पत्र पेश करे। उन्होंने आरोप लगाया कि नीति आयोग की रिपोर्ट ने सच्चाई उजागर कर दी है। अठारह राज्यों की 2023-24 की रिपोर्ट में पंजाब को 18वें (सबसे निचले) स्थान पर रखा गया है। परगट सिंह के अनुसार, यह खराब नीतियों, कमजोर वित्तीय प्रबंधन और खोखली नारेबाजी वाली राजनीति का परिणाम है। सरकार विज्ञापनों और पोस्टरों के जरिए खुद को नंबर एक बताकर न केवल पंजाब बल्कि पूरे देश को गुमराह कर रही है।
पंजाब ने 100 में से मात्र 12.4 अंक प्राप्त किये हैं, जो राज्यों में सबसे कम है। मुफ्त सुविधाओं की गारंटी पूरी करने के चक्कर में पंजाब कर्ज के जाल में डूब रहा है। वर्तमान में राज्य का कर्ज लगभग 4.25 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है, जिसके 2026 के अंत तक पांच लाख करोड़ रुपये होने की आशंका है। रिपोर्ट के अनुसार पंजाब का 'क्वालिटी ऑफ एक्सपेंडिचर' स्कोर केवल 8.1 है, जिसका अर्थ है कि राज्य की आय का बहुत कम हिस्सा विकास कार्यों पर खर्च हो रहा है।
श्री सिंह ने कहा कि सत्ता में आने से पहले आप ने 54,000 करोड़ रुपये की योजना और पंजाब को आर्थिक रूप से मजबूत करने के दावे किये थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद सब खोखले साबित हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने लगभग Rs.2.25 लाख करोड़ के पुराने कर्ज को दोगुना करने की ओर कदम बढ़ा दिए हैं और पिछले चार वर्षों में कोई वास्तविक विकास कार्य नहीं हुआ है। यहां तक कि 'इन्वेस्ट पंजाब' जैसे कार्यक्रम भी महज दिखावा साबित हुए हैं।
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