नयी दिल्ली , मई 12 -- देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 के प्रश्न पत्र लीक होने और उसके बाद परीक्षा रद्द किए जाने के सरकार के फैसले पर विपक्ष दलों ने इसे सरकार की विफलता करार देते हुए आरोप लगाया है कि वह इस तरह की परीक्षाएं आयोजित करने में विफल साबित हुई है।

उल्लेखनीय है कि नीट यूजी 2026 परीक्षा तीन मई को 22 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने देशभर में दी थी, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया क्योंकि बड़े पैमाने पर आरोप लगे हैं कि लीक हुई सामग्री असली प्रश्नपत्र से काफी मिलती-जुलती थी।

विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि वर्तमान सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) एक भी परीक्षा कदाचार मुक्त संपन्न करवाने में सक्षम नहीं है। 2024 के विवादों के बाद 2026 की परीक्षा का भी इसी तरह निरस्त होना सरकारी दावों और सुरक्षा इंतजामों की पोल खोलता है। जैसे-जैसे जांच बढ़ रही है, छात्रों और अभिभावकों का भी गुस्सा सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक फूट रहा है।

नीट-यूजी 2026 के रद्दीकरण ने एक भीषण राजनीतिक टकराव को जन्म दे दिया है। विपक्षी दलों ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर देश की शिक्षा व्यवस्था में 'संगठित भ्रष्टाचार' को फलने-फूलने देने का आरोप लगाया है। इस कड़ी में सबसे तीखा हमला कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने किया है। उन्होंने इस रद्दीकरण को 'युवाओं के भविष्य के खिलाफ अपराध' करार दिया है।

श्री गांधी ने सरकार पर एक ऐसी 'भ्रष्ट प्रणाली' चलाने का आरोप लगाया, जिसने लाखों छात्रों की आकांक्षाओं को कुचल कर रख दिया है। उन्होंने 'एक्स' पर लिखा है, "22 लाख से अधिक छात्रों की कड़ी मेहनत, त्याग और सपनों को इस भ्रष्ट भाजपा समर्थित तंत्र ने कुचल दिया है।" उन्होंने उन परिवारों के संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ पिताओं ने कर्ज लिया, कुछ माताओं ने अपने गहने बेचे और लाखों छात्र रात-रात भर जागकर पढ़ाई करते रहे, लेकिन अंत में उनके हाथ केवल निराशा लगी।

श्री गांधी ने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाले पेपर लीक घोटालों ने परीक्षा प्रणाली की गहरी संरचनात्मक खामियों को उजागर कर दिया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "हर बार पेपर लीक माफिया बच निकलता है, जबकि ईमानदार छात्रों को भुगतना पड़ता है"। बार-बार परीक्षाओं का रद्द होना और इन विवादों ने परिवारों पर गंभीर भावनात्मक और वित्तीय बोझ डाल दिया है।

एक अन्य पोस्ट में उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति पर भी सरकार को घेरा, जिनका नाम आलोचकों ने 2024 के विवाद से जोड़ा था। उन्होंने लिखा, "भाजपा उन लोगों को इसी तरह पुरस्कृत और संरक्षित करती है, जो लाखों मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ खेलते हैं"। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, "वह बाजार जहां आपकी मेहनत और सपनों की नीलामी हो रही है, वहां केवल एक ही नियम है- जितनी बड़ी चोरी, उतना बड़ा इनाम।"ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने नीट-यूजी 2026 के रद्दीकरण को छात्रों के 'पवित्र विश्वास' पर गहरा आघात बताया है। उन्होंने कहा कि जब परीक्षाओं की शुचिता से समझौता होता है तो यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि उन लाखों उम्मीदवारों के साथ विश्वासघात है, जिन्होंने कड़े अनुशासन और सुख-सुविधाओं का त्याग कर अपनी तैयारी के लिए रातों की नींद गवायी थी। श्री पटनायक ने चेतावनी दी कि एक राष्ट्र के रूप में हम अपने युवाओं की नियति और भारत के भविष्य के साथ जुआ नहीं खेल सकते। उन्होंने मांग की कि छात्रों का भरोसा बहाल करने के लिए इस मामले में जवाबदेही तुरंत तय की जानी चाहिए।

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि बार-बार होने वाले पेपर लीक ने प्रतियोगी परीक्षाओं से जनता का विश्वास पूरी तरह खत्म कर दिया है। उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इस बात की क्या गारंटी है कि जब दोबारा परीक्षा होगी तो पेपर फिर से लीक नहीं होगा? उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि देश की परीक्षा प्रणाली अब 'लीक की राह' पर चलने लगी है, जिससे करोड़ों परिवारों के बीच भारी गुस्सा और निराशा पैदा हुई है।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सत्तारूढ़ दल पर 23 लाख छात्रों का भविष्य बर्बाद करने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि देश में पेपर लीक की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और भाजपा शासित राज्यों में एक सामान्य प्रतियोगी परीक्षा भी पारदर्शी तरीके से आयोजित नहीं हो पा रही है। श्री यादव ने इस बात पर जोर दिया कि अब 23 लाख उम्मीदवारों को 552 शहरों के केंद्रों पर दोबारा यात्रा करनी होगी, जिससे छात्रों और उनके अभिभावकों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा और उन्हें गंभीर मानसिक और शारीरिक तनाव का सामना करना होगा।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चिंता जताते हुए कहा, "दाल में कुछ काला है, सरकार ध्यान नहीं दे रही, छात्रों का भविष्य बर्बाद कर रही है।

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