कोटा , जून 16 -- राजस्थान में विधानसभा के पूर्व विपक्ष के नेता राजेन्द्र राठौड़ ने मंगलवार को कहा कि नीट परीक्षा से पांच दिन पहले श्री राहुल गांधी का कोटा दौरा केवल राजनीतिक पर्यटन है।

श्री राठौड़ ने आज यहां पत्रकारों से कहा कि नीट पेपर लीक मामला देश के 22 लाख विद्यार्थियों और उनके परिवारों से जुड़ा एक अत्यंत संवेदनशील विषय है। आगामी 21 जून को नीट की दोबारा परीक्षा होने जा रही है। ऐसे में परीक्षा से महज पांच दिन पहले 17 जून को कोटा में राजनीतिक कार्यक्रम करने का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि इसमें मेहनतकश छात्र और उनके परिवार शामिल नहीं होंगे।

उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि भाजपा वाले कोचिंग संचालकों को धमका रहे हैं। असल में भय का माहौल कांग्रेस के भीतर है कि कहीं यह राजनीतिक कार्यक्रम फ्लॉप न हो जाए। इसी डर से गहलोत जी के कहने पर उनके खासमखास पूर्व मंत्री और उनकी पूरी टोली कोचिंग संस्थानों में घूमकर बच्चों को रैली में भेजने की मिन्नतें कर रही है क्योंकि यह उनकी नाक का सवाल है।

श्री राठौड़ ने कहा कि जिस व्यक्ति को यह नहीं पता कि चार दिन बाद बच्चों की महत्वपूर्ण परीक्षा है, वह उनके माता-पिता से पढ़ाई छोड़कर रैली में आने को कह रहा है। इसे कहते हैं असली भय का माहौल। उन्नीस पेपर लीक का रिकॉर्ड बनाने वाले गहलोत जी का बच्चों की चिंता से कोई लेना-देना नहीं है। वह भूल गए कि खुद सचिन पायलट ने उनकी जादूगरी पर सवाल उठाए थे। अब राजस्थान और आलाकमान दोनों पर जादूगरी न चलने के कारण वह बेचैनी में अनर्गल टिप्पणियां कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जब पिछली कांग्रेस सरकार के समय 19 पेपर लीक हुए थे, तब राहुल गांधी को युवाओं के सपनों पर प्रहार और अशोक गहलोत सरकार की विफल भर्ती व्यवस्था की याद क्यों नहीं आयी।

श्री राठौड़ ने कहा कि आगामी नीट परीक्षा को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने उच्चस्तरीय बैठक कर सुरक्षा के कड़े निर्देश दिए हैं और परीक्षा माफिया को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जायेगा।

इस अवसर पर ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधते हुए कहा कि नीट परीक्षा में सिर्फ तीन दिन बचे हैं। कोटा में बच्चे अपना करियर बनाने आते हैं और दिन-रात एक करके पढ़ाई करते हैं। वे आखिरी वक्त में अपनी किताबें छोड़कर राहुल गांधी का राजनीतिक प्रवचन सुनने क्यों जायेंगे। इसमें किसी को धमकाने की जरूरत नहीं है। यह बच्चों का सीधा फैसला है कि उन्हें अपना भविष्य प्यारा है, कांग्रेस का सर्कस नहीं।

उन्होंने कहा कि जब बच्चे पढ़ाई को चुन रहे हैं, तो लोकतंत्र खतरे में कैसे आ गया। यह 'भय का माहौल' और 'धमकी' जैसी मनगढ़ंत कहानियां सिर्फ राजस्थान कांग्रेस की डूबती नैया और अपनी नाकामी को छुपाने का एक घटिया प्रयास है। असल डर तो कांग्रेस नेताओं के दिमाग में है कि वे राहुल गांधी के सामने इस 'फ्लॉप शो' की सफाई कैसे देंगे।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित