पटना , मई 02 -- बिहार की राजधानी पटना के एक हॉस्टल में रहकर नीट परीक्षा की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में विशेष अदालत ने शनिवार को केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को दो महीने के अंदर इस मामले का अनुसंधान पूरा करने का प्रयास करने तथा तीन दिनों के अंदर मृतका की माता का बयान सक्षम दंडाधिकारी के समक्ष दर्ज करवाने का आदेश दिया।
अदालत ने मृतका के परिजनों को ढाई लाख रुपए का अंतरिम मुआवजा दिए जाने का भी आदेश दिया। बालकों का लैंगिक अपराध से संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) के विशेष न्यायाधीश राजीव रंजन रमन की अदालत ने मामले के सूचक एवं मृतका के परिजनों की ओर से दाखिल किए गए आवेदनों तथा सीबीआई की ओर से दाखिल किए गए प्रगति प्रतिवेदन पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया है।
अदालत ने अनुसंधान की शैली और रफ्तार पर भी नाराजगी प्रकट की है।अदालत ने प्रत्येक 14 दिन पर शपथ युक्त प्रगति प्रतिवेदन दाखिल करने का आदेश सीबीआई को दिया है। अदालत ने मृतका के परिजनों को ढाई लाख रुपए का अंतरिम मुआवजा दिए जाने का आदेश पटना जिला विधिक सेवा प्राधिकार को दिया है। अदालत ने मामले में 15 मई 2026 की अगली तिथि निश्चित की है।
गौरतलब है कि 09 जनवरी 2026 को चित्रगुप्त नगर थाना की पुलिस ने पीड़िता के पिता के बयान पर इस मामले की मूल प्राथमिकी दर्ज की थी।आरोप के अनुसार पीड़िता अपने हास्टल में बेहोश पायी गयी थी। पीड़िता के पिता ने अपनी पुत्री के शरीर पर चोट के निशान पाये जाने की बात कही थी। साथ ही, उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने का प्रयास किये जाने का भी शक जाहिर किया था। बाद में इलाज के दौरान पीड़िता की मृत्यु अस्पताल में हो गई थी। मृतका को नाबालिग पाए जाने के बाद मामले का मूल अभिलेख पौक्सो एक्ट की विशेष अदालत को सौंप दिया गया था । बिहार सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने की सिफारिश की थी, जिसके बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी । सीबीआई आरसी 07/2026 के रूप में अपनी प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।
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