पटना , अप्रैल 07 -- िहार की राजधानी पटना के एक हॉस्टल में रहकर नीट परीक्षा की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में आज विशेष अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई )को ना तो हॉस्टल के मलिक के आवास का सर्च वारंट दिया और ना ही हॉस्टल के सील को खोलने की अनुमति दी। बालकों का लैंगिक अपराध से संरक्षण अधिनियम पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश राजीव रंजन रमन की अदालत में सीबीआई की ओर से एक आवेदन दाखिल कर शंभू गर्ल्स हॉस्टल के ऊपरी मंजिल पर स्थित जेल में बंद अभियुक्त हॉस्टल मालिक मनीष रंजन के आवास की तलाशी के लिए सर्च वारंट जारी किए जाने की प्रार्थना की गई थी जबकि अभियुक्त मनीष रंजन की ओर से एक आवेदन दाखिल कर उसके आवास को खोलने के लिए आदेश दिए जाने की प्रार्थना की गई थी। अदालत ने इन दोनों आवेदन पर सुनवाई के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। आज विशेष अदालत ने अपने आदेश में सीबीआई से हॉस्टल के सील किए जाने के संबंध में कई सवाल पूछे और मामले में 10 अप्रैल 2026 की तिथि निश्चित करते हुए दोनों आवेदनों को लंबित रखा है।

गौरतलब है कि 09 जनवरी 2026 को चित्रगुप्त नगर थाना की पुलिस ने पीड़िता के पिता के बयान पर इस मामले की मूल प्राथमिकी दर्ज की थी । आरोप के अनुसार पीड़िता अपने हास्टल में बेहोश पायी गयी थी। पीड़िता के पिता ने अपनी पुत्री के शरीर पर चोट के निशान पाये जाने की बात कही थी। साथ ही, उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने का प्रयास किये जाने का भी शक जाहिर किया था। बाद में इलाज के दौरान पीड़िता की मृत्यु अस्पताल में हो गई थी। मृतिका को नाबालिग पाए जाने के बाद मामले का मूल अभिलेख पॉक्सो एक्ट की विशेष अदालत को सौंप दिया गया था । बिहार सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने की सिफारिश की थी जिसके बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी । सीबीआई आरसी 07/2026 के रूप में अपनी प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच कर रही है। इस मामले में गिरफ्तार हॉस्टल मालिक मनीष रंजन जेल में बंद है। पॉक्सो एक्ट की विशेष अदालत हॉस्टल मलिक मनीष रंजन की नियमित जमानत याचिका खारिज कर चुकी है। अनुसंधान जारी है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित