पटना , मार्च 02 -- बिहार की राजधानी पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र स्थित एक हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में सोमवार बालकों का लैंगिक अपराध से संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) की विशेष अदालत में क्षेत्राधिकार के सवाल पर हॉस्टल मलिक की नियमित जमानत अर्जी पर सुनवाई नहीं हो सकी।
पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश राजीव रंजन रमन की अदालत में मामले के जेल में बंद अभियुक्त एवं शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष कुमार रंजन की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए आज तिथि निश्चित थी। अभियुक्त की ओर से बहस करते हुए उनके वकील ने अपने मुवक्किल को निर्दोष बताया और कहा के मामले के में अब तक क्रमवार इकट्ठा किए गए सबूतों में उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है और उसकी हिरासत अवैध है।
सुनवाई के दौरान अदालत के पूर्व निर्देश के अनुसार स्थानीय पुलिस ने अपना लिखित कथन दाखिल करते हुए कहा कि उसने मामले की जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी है इसलिए आगे की कार्रवाई के संबंध में सीबीआई जवाब देने में सक्षम है। सूचक की ओर से दाखिल किए गए लिखित कथन में यह कहा गया कि अगर मामला अवैध हिरासत का है तो अभियुक्त को उच्च न्यायालय में आपराधिक रिट याचिका दाखिल करनी चाहिए।
दूसरी और सीबीआई ने एक आवेदन दाखिल कर कहा के मामले का अनुसंधान सीबीआई ने अपने हाथ में ले लिया है प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है और सीबीआई की विशेष न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत को मामले की प्राथमिकी सौंपी जा चुकी है इसलिए प्रस्तुत मामले का संपूर्ण अभिलेख सुनवाई के लिए सीबीआई की विशेष न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत को स्थानांतरित कर दिया जाए। कारा अधीक्षक सशरीर अदालत में उपस्थित हुए एवं अवैध हिरासत के संबंध में अपना लिखित जवाब दाखिल करने के लिए एक समय की प्रार्थना की जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने इस विषय पर अपना आदेश 11 मार्च 2026 तक के लिए सुरक्षित कर लिया कि मामले का अभिलेख सीबीआई की विशेष न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत को स्थानांतरित किया जाएगा या फिर अभियुक्त की जमानत अर्जी पर इसी अदालत में सुनवाई होगी।
गौरतलब है कि 09 जनवरी 2026 को पटना के चित्रगुप्त थाने की पुलिस ने मृतका शिवानी कुमारी( परिवर्तित नाम) के पिता के फर्द बयान एक मुकदमा दर्ज किया था।
आरोप के अनुसार मृतका अपने हॉस्टल में बेहोश पाई गई थी। मृतका के पिता ने अपनी पुत्री के शरीर पर चोट का निशान पाए जाने की बात कही थी साथ ही उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने का प्रयास किए जाने का भी शक जाहिर किया था। बाद में इलाज के दौरान छात्रा की मृत्यु हो गई थी। छात्रा की मृत्यु को लेकर काफी हंगामा हुआ था । पटना से लेकर दिल्ली तक धरना एवं प्रदर्शन हुए थे। बाद में बिहार सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई अपनी प्राथमिकी दर्ज कर जांच कर रही है। छात्रा नाबालिग थी इसलिए मामले की सुनवाई पॉक्सो एक्ट की विशेष अदालत में हो रही है।
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