बैतूल , अक्टूबर 21 -- मध्यप्रदेश के बैतूल में मनोवैज्ञानिक डॉ. संदीप गोहे ने नवरात्रि और अन्य त्योहारों के दौरान घरों के सामने, चौराहों और सड़कों पर रखे नींबू-मिर्च, कटे कद्दू, सिंदूर और पूजा सामग्री को लेकर लोगों से अंधविश्वास से दूर रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इन वस्तुओं को देखने, उन पर पैर पड़ने या उनके ऊपर से वाहन गुजरने से किसी तरह का अलौकिक या नकारात्मक प्रभाव पड़ने का कोई विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
डॉ. गोहे के अनुसार, ऐसी वस्तुओं को देखकर भय या आशंका महसूस होना सामाजिक मान्यताओं और पुरानी धारणाओं का परिणाम हो सकता है। किसी वस्तु को देखकर शुरुआती डर लगना स्वाभाविक है, लेकिन केवल आशंका के आधार पर किसी अनहोनी या खतरे का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। उन्होंने लोगों को अफवाहों पर ध्यान न देने और अनावश्यक मानसिक तनाव से बचने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्थाओं का सम्मान जरूरी है, लेकिन इसके साथ दूसरों की सुविधा और सार्वजनिक स्वच्छता का ध्यान रखना भी आवश्यक है। घरों के मुख्य द्वार और सार्वजनिक रास्तों पर ऐसी सामग्री रखकर या फेंककर दूसरों को मानसिक परेशानी में डालने से बचना चाहिए।
डॉ. गोहे ने बच्चों पर पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक प्रभाव को लेकर अभिभावकों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में बड़ों को शांत और संतुलित व्यवहार करना चाहिए। बच्चों के सामने इन वस्तुओं को किसी अनिष्ट का संकेत बताकर डराने से उनके मन में अनावश्यक भय पैदा हो सकता है, जो उनके मानसिक विकास को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने कहा कि किसी के डर का मजाक उड़ाना उचित नहीं है, लेकिन बिना ठोस प्रमाण के आशंकाओं को सच मान लेना भी समझदारी नहीं है। लोगों को तार्किक और तथ्यात्मक सोच अपनाते हुए समाज में फैलने वाली भ्रामक खबरों और अंधविश्वासों से दूर रहना चाहिए।
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