चेन्नई , फरवरी 14 -- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शनिवार को बताया कि भारत-अमेरिका का संयुक्त उपग्रह निसार ( एनआईएसएआर) अब हर 12 दिन में 100 मीटर रेजोल्यूशन पर मिट्टी की नमी (सॉइल मॉइस्चर) की लगभग रियल-टाइम निगरानी कर रहा है।
इसरो ने जानकारी देते हुए बताया कि नासा-इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार (निसार) एस-बैंड और एल-बैंड में भारतीय भू-भाग की व्यवस्थित इमेजिंग कर रहा है, जिससे उच्च-रिजोल्यूशन वाला और जमीन पर घास का व्यापक डेटा प्राप्त हो रहा है। इस डेटा का उपयोग 100 मीटर रेजोल्यूशन पर मिट्टी की नमी के उत्पाद तैयार करने में सफलतापूर्वक किया गया है।
मिट्टी की नमी, फसल स्वास्थ्य, सिंचाई की आवश्यकता और सूखे के जोखिम का प्रमुख संकेतक है, जो भारत की कृषि और जल प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एस-बैंड और एल-बैंड दोनों के आंकड़ों से तैयार उत्पाद देश के विविध कृषि-जलवायु क्षेत्रों-सिंचित मैदानों, वर्षा-आधारित खेती, अर्ध-शुष्क और उच्च वर्षा क्षेत्रों-में सुसंगत आकलन प्रदान करते हैं।
इसरो ने कहा कि निसार के एल-बैंड और एस-बैंड की पूरक क्षमताएं इसे और प्रभावी बनाती हैं-एल-बैंड वनस्पति के भीतर गहराई तक प्रवेश और बेहतर संवेदनशीलता देता है, जबकि एस-बैंड सतही स्तर पर अधिक सूक्ष्म विवरण प्रदान करता है। संयुक्त दोहरी-आवृत्ति आधारित उत्पाद विविध कृषि परिदृश्यों में अधिक सुदृढ़ परिणाम देते हैं।
प्रारंभिक उत्पादों का देशभर के विभिन्न मृदा प्रकारों और वर्षा क्षेत्रों में जमीनी सेंसरों के माध्यम से सत्यापन किया जा रहा है। इसरो ने बताया कि और भी सूक्ष्म (फील्ड-स्केल) उत्पाद विकसित करने का कार्य जारी है।
निसार को 30 जुलाई 2025 को श्रीहरिकोटा स्थित भारतीय अंतरिक्ष केंद्र से जीएसएलवी-एफ16 रॉकेट द्वारा 747 किमी की ऊंचाई पर स्थापित किया गया था। यह मिशन पृथ्वी की बदलती पारिस्थितिक प्रणालियों, हिम आवरण, समुद्र-स्तर वृद्धि, भूजल और प्राकृतिक आपदाओं के अध्ययन के लिए तैयार किया गया है।
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