लखनऊ , मई 30 -- हिन्दी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर शनिवार को लखनऊ समेत समूचे उत्तर प्रदेश में बुद्धिजीवियों ने अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि आज के व्यवसायिक युग में निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता एक बड़ी चुनौती है और इससे बचने के लिये किसी भी संस्था अथवा स्तंभ के प्रभाव से दूरी बनानी जरुरी है।
नामचीन विद्वान प्रोफेसर डॉक्टर अशोक जाह्नवी प्रसाद ने गोरखपुर में कहा कि पत्रकार को न्यायपालिका,कार्यपालिका और विधायिका की तरफ झुकाव नहीं होना चाहिए बल्कि उसे स्वंतंत्र होना चाहिए। पत्रकारिता लोकतंत्र का ऐसा स्तंभ जिसे अन्य तीन स्तंभों से दूरी बनाकर रखनी होगी. पत्रकार का सबसे बड़ा पुरस्कार पाठकों की विश्वसनीयता होता है.। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ने पारंपरिक पत्रकारिता को आत्म मंथन के लिए बाध्य कर दिया है।
प्रोफेसर प्रसाद ने कहा कि संविधान की रक्षा का दायित्व पत्रकारिता पर ही है. डर के मध्य पत्रकारिता नहीं होती.हमें इमरजेंसी में अपने अस्तित्व के लिए लड़ने का मौका मिला था, पर हमने पूरा सबक नहीं सीखा.।उन्होंने कहा कि पत्रकार को संविधान के मूल्यों की रक्षा के लिए एवं जनता के हितों के लिए बराबर लेखनी चलाते रहना चाहिए।
प्रतापगढ़ में आयोजित एक संगोष्ठी में जिलाधिकारी अभिषेक पांडेय ने कहा कि पत्रकारिता में खबर वास्तविक होनी चाहिए तथा उसका शीर्षक ऐसा होना चाहिए जो लोगों को खबर पढ़ने के लिए बाध्य करें। उन्होने कहा , " मै आलोचना की खबरों को विशेष तरजीह देता हूँ इससे हमारा मार्गदर्शन होता है कि हमें कहाँ पर ध्यान देने की अधिक आवश्यकता है ।"कौशांबी में वक्ताओं ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता के लंबे अंतराल में पत्रकारिता मिशन के स्थान पर एक व्यवसायिक रूप ले चुकी है। जो स्वस्थ लोकतंत्र केलिए अच्छे संकेत नहीं है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर आंच ना आए इसका ध्यान सरकार और मीडिया संस्थानों के मालिकों को रखने की जरूरत है।
रायबरेली में योगी सरकार के राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि स्वाधीनता आंदोलन से लेकर वर्तमान समय तक सामाजिक जागरण, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा तथा राष्ट्र निर्माण में हिंदी पत्रकारिता का अभूतपूर्व योगदान रहा है। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता दिवस पर सभी पत्रकारों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि निष्पक्ष, जिम्मेदार और जनसरोकारों से जुड़ी पत्रकारिता आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी स्वतंत्रता संग्राम के दौर में थी।
इटावा में हिन्दी पत्रकारिता दिवस के मौके पर आयोजित गोष्ठी में वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. राजीव चौहान ने पत्रकारिता के बिंदुओं पर प्रकाश डाला, तो विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार-कवि डॉ. कुश चतुर्वेदी ने आजादी से अब तक पत्रकारों के संघर्ष पर चर्चा की।
प्रेस क्लब अध्यक्ष दिनेश शाक्य की अध्यक्षता में हुई गोष्ठी में सुघर सिंह, प्रदीप शर्मा, अमित तिवारी, प्रेम सिंह शाक्य समेत कई पत्रकारों ने पत्रकारिता के बदलते परिवेश, सोशल मीडिया और पत्रकारों की सुरक्षा पर अपने विचार रखे।
जौनपुर पत्रकार संघ के अध्यक्ष शशि मोहन सिंह क्षेम ने शनिवार को कहा कि हिंदी पत्रकारिता का स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक देश व समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
जौनपुर पत्रकार संघ के अध्यक्ष शशिमोहन सिंह क्षेम ने हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि आज देश के लाखों युवा हिंदी समाचार पत्रों को पढ़कर उनसे ज्ञान अर्जित करके विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हो रहे हैं। उन्होंने आज के दौर में पत्रकारिता के क्षेत्र में आ रही गिरावट पर भी चिंता व्यक्त की। श्री क्षेम ने कहाकि आज उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय भी समाचार पत्रों में प्रकाशित समस्याओं पर संज्ञान लेकर कार्यवाही भी रही है। ऐसे में पत्रकारों को सजग होकर कलम चलाने की आवश्यकता है।
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