रांची , नवंबर 07 -- झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने निशा भगत मौत मामले को लेकर हेमंत सरकार पर बड़ा निशान साधा है।

श्री मरांडी ने आज कहा कि निशा भगत का अपराध क्या था? हेमंत सोरेन जी, जवाब दीजिए! निशा भगत आदिवासी समाज के अधिकारों की बात करती थीं। क्या यही उनका अपराध था? जिस बेटी ने दूसरों के हक़ के लिए आवाज़ उठाई, जब उसे खुद मदद की ज़रूरत पड़ी, तब हेमंत सरकार का प्रशासन कहाँ था? आज सवाल निशा की लड़ने की क्षमता पर कौन उठा सकता है? सवाल तो उस प्रशासन से है, जिसका फ़र्ज़ था उनकी गुहार सुनना। निशा अपनी बात कह गईं। अब जवाब देने की बारी सत्ता की है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी, आदिवासियों का वोट चाहिए तो आप उनके दरवाज़े तक पहुँच जाते हैं। आज उसी समाज की एक बेटी की मौत पर आपसे दो शब्द क्यों नहीं निकल रहे? आपकी विधायक पत्नी कल्पना सोरेन मंचों से आदिवासी महिलाओं के अधिकारों की बात करती हैं। कल्पना जी, अपनी चुप्पी तोड़िए। निशा के परिवार को बताइए कि उनकी बेटी ने जो सवाल उठाए थे, उनके जवाब उन्हें कब और कैसे मिलेंगे। भाषणों में जताई गई चिंता और दुख की घड़ी में ओढ़ी गई इस चुप्पी का फ़र्क़ लोग समझते हैं।

श्री मरांडी ने कहा कि अजय तिर्की अपने बचाव में अब कितनी बेशर्मी से कहने लगे हैं कि वो निशा को निजी तौर पर नहीं जानते थे और भाजपा लाश पर राजनीति कर रही है। फिर तो अजय जी को ये भी बताना चाहिए कि जब वे निशा को जानते ही नहीं थे तो उनके बारे में गंदी, भद्दी, घटिया और चरित्र पर कीचड़ उठाने वाले जो उनका वीडियो सोशल मीडिया पर घूम रहा है, वो सब किसके सह पर और किसके कहने पर वे कह रहे थे?श्री मरांडी ने पूछा कि अजय के साथ ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कल्पना सोरेन भी बतायें कि निशा के साथ किया गया (अजय का ) ये अपराध और निशा के निजी जीवन पर किया गया नीचता पूर्ण हमला और कायरतापूर्ण अपमान उन्हें जेल की सलाख़ों के पीचें पंहुचा कर सजा दिलाने के लिये कैसे पर्याप्त नहीं है?क्या इसके बिना निशा के साथ इंसाफ़ हो सकेगा? क्या सत्ता के संरक्षण में पल रहे अजय तिर्की की जगह कोई दूसरा आदमी होता तो अबतक वह भी इसी तरह बाहर घूम कर बेशर्मी से बयान देने के लायक़ रहने दिया जाता?श्री मरांडी ने कहा कि अजय तिर्की जी, निशा के जीते-जी जो सवाल उठे, क्या उनकी मौत के साथ वे भी दफ़न कर दिए जाएँ? उनके संघर्ष को नमन करना, उनके आरोपों की जाँच माँगना और उनके परिवार के साथ खड़ा होना आपकी नज़र में राजनीति है? "लाश पर राजनीति" कह देना आसान है। निशा ने जो कहा, उसका जवाब दीजिए।

उन्होंने कहा कि मेरी माँग साफ़ है। पूरे मामले की सीबीआई जाँच हो। अजय तिर्की पर लगे आरोपों और उनके पीछे किसी राजनीतिक संरक्षण की बात की जाँच हो। निशा ने अपनी मृत्यु से पहले जिस थाना प्रभारी को फ़ोन किया था, उस कॉल का रिकॉर्ड सुरक्षित किया जाए। थाना प्रभारी बताएँ कि निशा ने उनसे क्या कहा और फ़ोन रखने के बाद उन्होंने क्या कार्रवाई की?अजय तिर्की हों या थाना प्रभारी, किसी की गिरफ्तारी में एक दिन की भी देरी क्यों हो? हेमंत सोरेन जाँच पूरी होने तक मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दें।

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