कोलकाता , अगस्त 06 -- पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्य के कपड़ा और चाय उद्योगों में विशेष रुचि दिखाई है तथा बंगाल के कपड़ा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है।

श्री अधिकारी ने गुरुवार को मिलन मेला मैदान में कपड़ा मेला का उद्घाटन करते हुए कहा, "केंद्रीय वित्त मंत्री ने मुझसे कहा कि पश्चिम बंगाल के दो क्षेत्रों चाय बागानों और कपड़ा उद्योग में उनकी विशेष रुचि है। उन्होंने हमारे बुनकरों द्वारा बुने गए उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों को देखा है और महसूस किया है कि कपड़ा उद्योग के लिए अभी और बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है।"मुख्यमंत्री ने कहा, "वह 24 से 28 अगस्त के बीच राज्य का दौरा कर सकती हैं। मैं उनके तथा कपड़ा क्षेत्र के प्रतिनिधियों के बीच एक बैठक आयोजित करने की कोशिश करूंगा।"श्री अधिकारी की यह टिप्पणी मंगलवार को नयी दिल्ली में श्रीमती सीतारमण से हुई मुलाकात के एक दिन बाद आई। इस बैठक में दोनों नेताओं ने पश्चिम बंगाल पर लगभग आठ लाख करोड़ रुपये के कर्ज और 2018 से जीएसटी ऑडिट रिपोर्ट जमा न करने समेत कई मुद्दों पर चर्चा की।

मेले में उद्योगपतियों और उद्यमियों को संबोधित करते हुए श्री अधिकारी ने कहा कि पिछले पांच दशकों में वाम मोर्चे और तृणमूल कांग्रेस की सरकारों के तहत बंगाल पिछड़ गया था, लेकिन अब 'डबल-इंजन सरकार' के दौर में स्थिति बदल रही है। उन्होंने कहा, "करीब 50 सालों में बंगाल सिर्फ पीछे ही गया है। किसी भी तरह की गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह 'अमृत काल' का समय है। बंगाल में निवेश करें और राज्य आगे बढ़ेगा। अगले एक-दो साल में हालात काफी बदल जाएंगे।"मुख्यमंत्री ने कपड़ा उद्योग की कच्चे माल के लिए गुजरात पर निर्भरता का जिक्र करते हुए कहा, "पिछली सरकार अक्सर दूसरे राज्यों की उपेक्षा करने की कोशिश करती थी। लेकिन हमें यह समझना चाहिए कि यह एक ही देश है। अगर सूरत समृद्ध होता है, तो पश्चिम बंगाल को भी फायदा होता है क्योंकि हमारे कपड़ा उद्योग का अधिकांश कच्चा माल वहीं से आता है।"श्री अधिकारी ने कहा कि कपड़ा मेले में करीब 200 स्टॉल लगाए गए हैं और इस आयोजन के दौरान 500 करोड़ रुपये से अधिक के व्यावसायिक लेनदेन का अनुमान है। उन्होंने कहा कि कपड़ा क्षेत्र राज्य में बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका का सहारा है और बंगाल के पास औद्योगिक विकास को गति देने के लिए प्रचुर मात्रा में कुशल श्रमशक्ति, बुद्धिमत्ता और मानव संसाधन मौजूद हैं।

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