वाराणसी , जून 25 -- ज्येष्ठ मास की निर्जला एकादशी पर गुरुवार को श्री काशी विश्वनाथ वार्षिक कलश यात्रा राजेंद्र प्रसाद घाट से श्री काशी विश्वनाथ मंदिर तक निकाली गई।
इस कलश यात्रा में जगत के नाथ बाबा विश्वनाथ का 1008 कलशों के जल से अभिषेक किया गया। हजारों की संख्या में पुरुष एवं महिला श्रद्धालुओं ने पीले वस्त्र धारण कर यात्रा की शोभा बढ़ाई। वहीं विशालकाय प्रतीकात्मक नंदी पर विराजमान महादेव और माता पार्वती की झांकी ने सभी श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
11 रजत कलशों में दूध एवं पवित्र नदियों और तीर्थस्थलों सिंधु नदी, व्यास, झेलम, मानसरोवर, चिनाब, रावी, प्रयागराज महाकुंभ, गंगा तथा ऋषिकेश का जल भरकर बाबा को अर्पित किया गया। राजेंद्र प्रसाद घाट से श्री काशी विश्वनाथ मंदिर तक निकली इस भव्य यात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह, हर-हर महादेव के जयघोष और सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण अद्भुत रहा। डमरुओं की गूंज और शंखनाद से पूरा वातावरण शिवमय हो उठा।
श्री काशी मोक्षदायिनी सेवा समिति द्वारा इस परंपरा की शुरुआत वर्ष 1998 में की गई थी। तभी से काशी में निर्जला एकादशी के अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ वार्षिक कलश यात्रा निकालने की परंपरा निरंतर चली आ रही है।
कार्यक्रम के संयोजक निधिदेव अग्रवाल ने बताया कि महादेव की नगरी काशी अपनी अनूठी सनातन परंपरा और संस्कृति के लिए विश्वभर में जानी जाती है। इस वर्ष की कलश यात्रा का उद्देश्य विश्व शांति की कामना करना था। उन्होंने कहा कि पूरे विश्व में जिस प्रकार अशांति का वातावरण बनता जा रहा है, उससे मुक्ति दिलाने की शक्ति केवल बाबा विश्वनाथ के पास है। विश्व कल्याण की भावना के साथ सभी श्रद्धालुओं ने बाबा का जलाभिषेक किया।
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