रायपुर , सितंबर 03 -- छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने विद्यार्थियों के कल्याण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को विश्वविद्यालयों की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए निजी विश्वविद्यालयों से शोध की गुणवत्ता, रोजगारपरक पाठ्यक्रम और सामाजिक दायित्वों पर विशेष ध्यान देने को कहा है।
श्री डेका ने गुरुवार को निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की बैठक में शिक्षा एवं शोध की गुणवत्ता सहित विभिन्न विषयों की समीक्षा की। उन्होंने विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) में बेहतर ग्रेडिंग के लिए आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए। साथ ही विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात संतुलित रखने और प्रत्येक विश्वविद्यालय में कम से कम एक हजार विद्यार्थियों की संख्या सुनिश्चित करने की दिशा में प्रयास करने को कहा है।
राज्यपाल ने कहा कि पीएचडी उपाधि प्रदान करने की प्रक्रिया गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी होनी चाहिए। पीएचडी पंजीयनों की विशेषज्ञों के माध्यम से रैंडम जांच कराई जाएगी, ताकि शोध की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। विश्वविद्यालय ऐसे शोध को प्रोत्साहित करें, जिसका समाज और देश के विकास में वास्तविक योगदान हो।
उन्होंने कहा कि नए पाठ्यक्रम शुरू करने से पहले संबंधित क्षेत्र की आवश्यकता और विद्यार्थियों की रुचि का सर्वेक्षण किया जाना चाहिए। जिन पाठ्यक्रमों में पर्याप्त विद्यार्थी नहीं हैं, उन्हें बंद करने पर विचार किया जाए और रोजगार तथा भविष्य की संभावनाओं वाले विषयों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने पर्यावरण विज्ञान और साइबर सुरक्षा जैसे उभरते क्षेत्रों में पाठ्यक्रम शुरू करने तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप इंटीग्रेटेड कोर्स को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।
श्री डेका ने निजी विश्वविद्यालयों को आसपास के गांव गोद लेकर शिक्षा एवं स्वास्थ्य से जुड़े नियमित कार्यक्रम संचालित करने को कहा। उन्होंने गोद लिए गांवों में स्वास्थ्य जागरूकता और स्तन कैंसर सर्वे जैसे कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए। विद्यार्थियों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग और ध्यान को दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाने के प्रयास करने को भी कहा।
राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए शोध एवं अकादमिक गतिविधियां बढ़ाने पर जोर दिया। फार्मेसी पाठ्यक्रम संचालित करने वाले विश्वविद्यालयों को विद्यार्थियों के व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए प्रतिष्ठित कंपनियों के साथ समन्वय और पाठ्यक्रम की गुणवत्ता की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने विश्वविद्यालयों से नशामुक्ति अभियान में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने और युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने का भी आह्वान किया।
बैठक में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, उच्च शिक्षा सचिव अविनाश चंपावत, निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष वी.के. गोयल सहित विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति उपस्थित थे।
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