लखनऊ , जनवरी 11 -- उत्तरप्रदेश में छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति योजना का लाभ अब उन्हीं विद्यार्थियों को मिलेगा, जिनका प्रवेश निजी शिक्षण संस्थानों में पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया के तहत हुआ होगा। योगी सरकार ने पात्र विद्यार्थियों के हितों की रक्षा और दुरुपयोग को रोकने के लिए दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना की नियमावली-2023 में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। यह बदलाव अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के साथ-साथ सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों पर भी समान रूप से लागू होगा। योजना का संचालन समाज कल्याण विभाग कर रहा है।

समाज कल्याण उपनिदेशक आनंद कुमार सिंह के मुताबिक संशोधन का मुख्य उद्देश्य निजी शिक्षण संस्थानों में प्रवेश प्रणाली को तकनीकी रूप से अधिक पारदर्शी, स्पष्ट और जवाबदेह बनाना है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि योजना का लाभ केवल वास्तविक पात्र छात्र-छात्राओं तक पहुंचे और मैनेजमेंट कोटा, स्पॉट एडमिशन जैसी व्यवस्थाओं के जरिए फर्जी या गैर-मानक प्रवेश कर योजना का गलत फायदा न उठाया जा सके।

संशोधित नियमों के अनुसार निजी शिक्षण संस्थानों के व्यावसायिक या तकनीकी पाठ्यक्रमों में पढ़ रहे एससी/एसटी विद्यार्थियों को योजना का लाभ तभी मिलेगा जब उनका प्रवेश विज्ञापन, मेरिट/रैंक सूची और चयन सूची जैसी पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से हुआ हो। कॉलेजों को आवेदन आमंत्रित करने के लिए सार्वजनिक विज्ञापन जारी करना, रैंक सूची तैयार करना और चयन सूची प्रकाशित करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही छात्रों से केवल सक्षम प्राधिकारी या शुल्क नियामक समिति द्वारा स्वीकृत शुल्क ही लिया जा सकेगा।

संशोधन के बाद सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को भी शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ मिलेगा, लेकिन वही शर्त लागू होगी कि प्रवेश पूरी तरह पारदर्शी तरीके से हुआ हो और उनसे केवल अनुमोदित शुल्क ही वसूला गया हो।

उपनिदेशक आनंद कुमार सिंह ने साफ कहा कि मैनेजमेंट कोटा, स्पॉट एडमिशन या किसी भी गैर-पारदर्शी व्यवस्था के तहत प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति योजना का लाभ नहीं मिलेगा। वहीं अगर कोई संस्था स्वीकृत सीमा से अधिक फीस वसूलती है, तो भी लाभ नहीं दिया जाएगा।

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