चंडीगढ़ , अक्टूबर 16 -- हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं अभियंता संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने बिजली क्षेत्र के निजीकरण और कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर राज्य सरकार को तीन दिवसीय हड़ताल का नया नोटिस देते हुए कहा है कि एक दिसंबर से पहले मांगे स्वीकार नहीं की गयी तो कर्मचारी और अभियंता एक से तीन दिसंबर तक हड़ताल करेंगे।
मोर्चे के नेता रविंद्र घनघस ने शुक्रवार को बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र भेजा गया है। उन्होंने कहा कि बिजली मंत्री अनिल विज के साथ 10 अगस्त को हुई बैठक के बाद मोर्चे ने 11 से 13 अगस्त तक प्रस्तावित हड़ताल दो महीने के लिए स्थगित कर दी थी, लेकिन अब तक कर्मचारियों की एक भी मांग स्वीकार नहीं की गयी है।
श्री घनघस ने कहा कि राज्य बिजली बोर्ड के पुनर्गठन के समय अधिक कुशल व्यवस्था का भरोसा दिया गया था, लेकिन विभागीय घाटा बढ़ता रहा है। उन्होंने कृषि क्षेत्र के लिए अलग वितरण कंपनी 'एग्रो-डिस्कॉम' बनाने की प्रस्तावित योजना पर भी सवाल उठाये। उनका कहना है कि किसानों के लिए पहले से ही समर्पित बिजली फीडर मौजूद हैं।
मोर्चे के अनुसार, हरियाणा विद्युत नियामक आयोग गुरुग्राम और नूंह में एक निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने की प्रक्रिया में है। मोर्चे ने स्पष्ट किया है कि निजीकरण से संबंधित कोई अधिसूचना जारी होने या जमीनी स्तर पर स्मार्ट मीटर लगाने की कार्रवाई शुरू होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की जायेगी।
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) के मीडिया सलाहकार वी.के. गुप्ता ने बताया कि मोर्चा 17 अक्टूबर को रोहतक में किसानों, मजदूरों, कर्मचारियों, अभियंताओं और उपभोक्ताओं का राज्यस्तरीय सम्मेलन आयोजित करेगा।
कर्मचारियों की अन्य प्रमुख मांगों में बिजली क्षेत्र के सभी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करना, संविदा और अस्थायी कर्मचारियों को राहत देना, दैनिक वेतनभोगियों को नियमित करने की नीति बनाना, जोखिमपूर्ण कार्य करने वाले कर्मचारियों को पर्याप्त मासिक जोखिम भत्ता देना, समय पर पदोन्नति, कैशलेस चिकित्सा बीमा और मुफ्त बिजली यूनिट उपलब्ध कराना शामिल है।
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