नासिक , अक्टूबर 24 -- महाराष्ट्र में नासिक जिले के टमाटर किसान एक बार फिर गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं। बाजार में टमाटर के भाव बेहद निचले स्तर पर आ गए हैं, जहां 20 किलोग्राम का क्रेट महज 80 रुपये से 100 रुपये में बिक रहा है। स्थिति यह है कि किसानों के लिए फसल की तुड़ाई और उसे मंडी तक पहुंचाने की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।

बिक्री मूल्य बुनियादी लागत से भी नीचे गिर जाने के कारण कई किसानों ने घाटा और बढ़ने से रोकने के लिए टमाटर की फसल को खेतों में ही बिना तुड़ाई के छोड़ने का निर्णय लिया है।

तुड़ाई और परिवहन का खर्च निकालने के बाद किसानों के हाथ में प्रति 20 किलो क्रेट केवल 25 से 45 रुपये बच रहे हैं। जब बाजार में एक क्रेट 80 से 100 रुपये के बीच बिकता है, तो किसान को मजदूरों की तुड़ाई पर लगभग 20 रुपये और मंडी तक परिवहन पर 35 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इस प्रकार कुल 55 रुपये का खर्च केवल मंडी तक माल पहुंचाने में निकल जाता है।

परिवहन और तुड़ाई के 55 रुपये घटाने के बाद किसान के पास प्रति क्रेट 25 से 45 रुपये (लगभग 1.25 से 2.25 रुपये प्रति किलो) ही बचते हैं। इसमें खेत की जुताई, बीज, महंगे रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक, सिंचाई और महीनों की कड़ी मेहनत की लागत शामिल नहीं है। यदि इन खेती-बारी के खर्चों को जोड़ दिया जाए, तो किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।

किसानों को उम्मीद थी कि नवरात्रि के बाद कीमतों में सुधार होगा। उनका मानना था कि त्योहारी सीजन के दौरान सीमाओं पर पाबंदियों, अन्य राज्यों से मांग में कमी और निर्यात में बाधाओं के कारण शुरुआती दौर में कीमतें गिरी थीं। हालांकि, त्योहार खत्म होने और व्यापारिक परिचालन सामान्य होने के बाद भी टमाटर की कीमतों में सुधार होने के बजाय गिरावट जारी रही।

चूंकि टमाटर एक अति-शीघ्र नष्ट होने वाली फसल है, इसलिए किसान बेहतर कीमतों के इंतजार में इसे लंबे समय तक संग्रहीत करके नहीं रख सकते। लिहाजा, व्यापारियों द्वारा तय दरों पर ही अपनी उपज बेचने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं बचता, भले ही उससे बुनियादी खर्च भी न निकल पा रहे हों।

किसान पहले से ही सूखे जैसी स्थितियों, बेमौसम बारिश की आशंका, कृषि इनपुट (बीज-खाद) के बढ़ते दामों और मजदूरी में वृद्धि जैसी कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं। टमाटर की कीमतों में आई इस गिरावट ने उनकी पीड़ा को और बढ़ा दिया है। तुड़ाई और परिवहन का खर्च निकालना आर्थिक रूप से अव्यवहारिक होने के कारण कुछ किसानों ने मवेशियों को खेतों में खड़ी टमाटर की फसल चरने के लिए छोड़ दिया है, तो कई अन्य ने उपज को खेतों में ही सड़ने के लिए छोड़ दिया है।

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