नासिक , फरवरी 17 -- बॉम्बे उच्च न्यायालय मंगलवार को नासिक तपोवन में पेड़ काटने के मामले की सुनवाई करेगा। यह मामला 2026-27 के सिंहस्थ कुंभ मेले से पहले साधुग्राम बनाने के लिए करीब 1,800 पेड़ों को काटने के प्रस्ताव से जुड़ा है।
पेड़ों की कटाई को चुनौती देने वाली याचिका नासिक के वकील और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) नेता नितिन पद्माकर पंडित ने दायर की है। उन्होंने राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा है कि बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से पर्यावरण को काफी नुकसान होगा।
इससे पूर्व, बॉम्बे उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया था कि उसकी पहले से इजाज़त के बिना कोई भी पेड़ नहीं काटा जाना चाहिए। यह आदेश तब आया जबराज्य सरकार ने न्यायालय को बताया कि जनता की आपत्तियों और सुझावों की जांच का प्रोसेस अभी भी चल रहा है।
राज्य की ओर से महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने न्यायालय को बताया था कि नासिक नगर निगम लोगों से संपर्क कर रही है और वृक्ष प्राधिकरण ने अभी तक कोई आखिरी फैसला नहीं लिया है। नासिक अगले साल सिंहस्थ कुंभ मेले की मेजबानी करेगा। नासिक के तपोवन इलाके में विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं, जिसमें आने वाले कुंभ मेले के लिए 300 करोड़ की परियोजनाओं के ज़रिए इलाके में साधुग्राम और एमआसीई (मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फ्रेंस और एग्ज़िबिशन) हब बनाने के लिए 34 एकड़ ज़मीन पर पेड़ काटने के प्रस्ताव का विरोध किया जा रहा है।
राज्य सरकार ने सिंहस्थ कुंभ मेले में आने वाले साधुओं के रहने की जगह, मुख्य साधुग्राम बनाने के लिए तपोवन इलाके में लगभग 1,800 पेड़ काटने का प्रस्ताव दिया है। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि इतनी बड़ी संख्या में पेड़ काटने से जैव-विविधता पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। साथ ही इस इलाके से गुज़रने वाली गोदावरी नदी पर बुरा असर पड़ सकता है। बताया जा रहा है कि नागरिकों ने इस कदम का विरोध करने के लिए "चिपको आंदोलन" जैसेविरोध प्रदर्शन भी किये हैं।
इससे पूर्व, राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल ने 15 जनवरी, 2025 तक पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी थी। आज की सुनवाई का नतीजा यह तय करने में अहम होगा कि कुंभ मेले की तैयारियों के लिए पेड़ों की कटाई का प्रस्ताव आगे बढ़ सकता है या नहीं।
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