मुंबई, 31अक्टूबर (वार्ता) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद) के विधायक रोहित पवार ने शनिवार को महाराष्ट्र सरकार पर आगामी नासिक कुंभ मेले से जुड़ी 35,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया है। इसके साथ ही उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी छिपाने को लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू करने का ऐलान किया है।

सूखे से प्रभावित किसानों को दी जा रही 5,000 रुपये की वित्तीय सहायता की तुलना कुंभ मेले के प्रस्तावित बजट से करते हुए श्री पवार ने सार्वजनिक धन के उपयोग में सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता पर सवाल उठाए।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में श्री पवार ने आरोप लगाया कि एक तरफ भीषण सूखे से जूझ रहे किसानों को मात्र 5,000 रुपये की राहत देकर उनके साथ मजाक किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार कुंभ मेले के लिए प्रस्तावित 35,000 करोड़ रुपये के खर्च का हिसाब देने से बच रही है। उन्होंने दावा किया कि उनके पास घटिया बुनियादी ढांचे के निर्माण और टेंडर शर्तों में हेरफेर से जुड़ी अनियमितताओं के शुरुआती सबूत मौजूद हैं।

श्री पवार ने बताया कि उन्होंने जनप्रतिनिधि के तौर पर विभिन्न सरकारी विभागों से आरटीआई के तहत आधिकारिक जानकारी मांगी थी, लेकिन अधिकारी जानबूझकर फाइलों और दस्तावेजों को छिपा रहे हैं।

सरकार पर निशाना साधते हुए श्री पवार ने कहा, " जनता की कमाई पर डाका डालने वाले ये लोग कौन हैं और इन्हें कौन बचा रहा है? सरकार यह जानकारी क्यों छिपा रही है, हम यह देखना चाहते हैं। लेकिन जानकारी नहीं दी गई तो हम चुप नहीं बैठेंगे।"एनसीपी (शरद) विधायक ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले में सभी उपलब्ध कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करेंगे ताकि दबाए गए दस्तावेजों को बाहर निकाला जा सके और इस पवित्र आयोजन की आड़ में भ्रष्टाचार करने वालों का पर्दाफाश किया जा सके।

कानूनी लड़ाई की शुरुआत करते हुए श्री पवार ने प्रमुख समाचार पत्रों में एक नोटिस प्रकाशित करवाया है, जिसमें आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी न देने पर संबंधित अधिकारियों को कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

उन्होंने कहा, " आज समाचार पत्रों में सार्वजनिक नोटिस देकर हमने कानूनी लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। हम हर कानूनी हथियार का इस्तेमाल करके इस छिपे हुए सच को बाहर लाएंगे और भ्रष्टाचार के इस काले बाजार को जनता की अदालत में खड़ा करेंगे।

गौरतलब है कि नाशिक कुंभमेले की तैयारियों के बीच बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के क्रियान्वयन और विशाल बजट को लेकर राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं।

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