भोपाल , अप्रैल 27 -- मध्यप्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र की शुरुआत आज दिवंगत जनों को श्रद्धांजलि के साथ हुई, जिसके बाद नारी शक्ति वंदन को लेकर शासकीय संकल्प प्रस्तुत करने की प्रक्रिया शुरू हुई। इस विषय पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा मतभेद भी देखने को मिला।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन में शासकीय संकल्प प्रस्तुत करते हुए कहा कि देश की संसद एवं सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। इस संकल्प के माध्यम से महिलाओं के सर्वांगीण विकास और सशक्तिकरण पर जोर दिया गया।

इसके पहले विशेष सत्र से पूर्व कांग्रेस विधायक दल की बैठक आयोजित हुई, जिसमें भाजपा पर महिलाओं के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया गया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं के हित में है तो वर्तमान 543 सीटों पर ही 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की स्पष्ट घोषणा करे। उन्होंने आरोप लगाया कि "नारी शक्ति वंदन" के नाम पर केवल दिखावा किया जा रहा है, जबकि हक देने से बचने की कोशिश हो रही है। वही भाजपा विधायक दल की बैठक भी मुख्यमंत्री आवास में हुई।

वही सदन में जब शासकीय संकल्प पर चर्चा का मुद्दा उठा, तब नेता प्रतिपक्ष ने परिसीमन के बाद आरक्षण लागू करने के प्रावधान पर आपत्ति जताते हुए वर्तमान व्यवस्था में ही 33 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग की। इस पर विधानसभा अध्यक्ष द्वारा इसे परंपरा के अनुरूप नहीं बताए जाने के बाद विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया।

इस विशेष सत्र को लेकर यह भी उल्लेखनीय है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में इस प्रकार का शासकीय संकल्प प्रस्तुत करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है।

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