रायपुर , अप्रैल 19 -- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर विपक्षी दलों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि देश की आधी आबादी को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने का महत्वपूर्ण अवसर गंवा दिया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने महिलाओं के सम्मान और अधिकारों को प्राथमिकता नहीं दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गृहमंत्री अमित शाह ने विधेयक को सरल और तार्किक तरीके से समझाया, इसके बावजूद विपक्ष ने इसका समर्थन नहीं किया। उनके अनुसार, ''आने वाले समय में कांग्रेस को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा और हमारा संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण नहीं मिल जाता।''इस दौरान भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह, प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, रायपुर महापौर मीनल चौबे, सांसद कमलेश जांगड़े और सांसद लक्ष्मी वर्मा भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में प्राचीन काल से महिलाओं को देवी स्वरूप मानकर सम्मान दिया जाता रहा है, लेकिन विपक्षी गठबंधन विशेषकर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और समाजवादी पार्टी (सपा) ने इस दिशा में आगे बढ़ने के प्रयासों को बाधित किया। उन्होंने इसे ''देश की महिलाओं की उम्मीदों पर पानी फेरने वाला कदम'' बताया।
उन्होंने राज्य सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए शौचालय निर्माण, उज्ज्वला योजना और महतारी वंदन योजना के माध्यम से लगभग 70 लाख महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस लंबे समय से महिला आरक्षण की बात करती रही है, लेकिन हर बार निर्णायक मौके पर पीछे हट जाती है।
इस अवसर पर अरुण सिंह ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि 17 अप्रैल का दिन ऐतिहासिक हो सकता था, लेकिन विपक्ष ने महिलाओं के अधिकारों के साथ ''गद्दारी'' की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और अन्य दलों ने हमेशा महिलाओं के हितों की उपेक्षा की है और इस बार भी वही रुख अपनाया गया।
उन्होंने कहा कि ''विपक्ष के नेताओं ने विधेयक पारित न होने पर खुशी जताई, जबकि यह महिलाओं के अधिकारों के लिए बड़ा नुकसान है।'' साथ ही उन्होंने कांग्रेस को ''चालबाज'' बताते हुए कहा कि जनता आने वाले समय में इसका जवाब देगी।
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