रायपुर , अप्रैल 30 -- छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में गुरुवार को 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (महिला आरक्षण) के समर्थन में लाए गए शासकीय संकल्प पर सत्ता पक्ष की ओर से भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं विधायक लता उसेण्डी ने पक्ष रखा, वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मातृशक्ति के सशक्तिकरण को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
सुश्री उसेण्डी ने अपने संबोधन में कहा, "नारी शक्ति वन्दन अधिनियम मातृशक्ति के प्रति भाजपा की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है। दशकों से लंबित महिला आरक्षण का सपना आज धरातल पर उतर रहा है। यह केवल एक कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और आधी आबादी को नीति-निर्धारण में समान भागीदारी सुनिश्चित करने वाला युगांतकारी कदम है।" उन्होंने कहा कि बस्तर और छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति में महिलाएं सदैव निर्णय प्रक्रिया में अग्रणी रही हैं। इस विधेयक के माध्यम से प्रदेश की बेटियों को विधानसभा और संसद में नेतृत्व सिद्ध करने का व्यापक अवसर मिलेगा।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि शाहबानो प्रकरण में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने शीर्ष न्यायालय के फैसले को पलटते हुए मुस्लिम महिलाओं को भरण-पोषण के अधिकार से वंचित किया था , जिसे देश भूला नहीं है। उन्होंने कहा, "पंचायतों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का श्रेय लेने का कांग्रेस का प्रयास गलत है। भाजपा सरकार ने 2008 में इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया। कांग्रेस ने महिलाओं को उतना ही दिया, जिससे उसे खतरा न हो, जबकि वर्तमान नेतृत्व ने इसे संकल्प से सिद्धि तक पहुंचाया है।"उन्होंने सदन से अपील करते हुए कहा कि सभी सदस्य दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस संकल्प का सर्वसम्मति से समर्थन करें।
श्री साय ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा,"मातृशक्ति के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए डबल इंजन सरकार प्रतिबद्ध है। छत्तीसगढ़ की यह पावन धरती माता शबरी, मां दंतेश्वरी और मां महामाया की भूमि है, जहां नारी को सदैव शक्ति के रूप में पूजा गया है।भारतीय संस्कृति में नारी केवल सम्मान की पात्र नहीं, बल्कि सृजन और शक्ति की आधारशिला है। 'या देवी सर्वभूतेषु मातृ-रूपेण संस्थिता' हमारी संस्कृति का मूल दर्शन है।"मुख्यमंत्री ने कहा, "नारी शक्ति वंदन में बाधा डालने वालों को जनता माफ नहीं करेगी। महिला आरक्षण देने की वास्तविक मंशा विपक्ष की कभी रही ही नहीं और वे परिसीमन तथा जनगणना जैसे मुद्दों को बहाना बनाकर इस ऐतिहासिक पहल को रोकने का प्रयास कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कार्य हुए हैं। स्वच्छ भारत मिशन, उज्ज्वला योजना, जनधन योजना, सुकन्या समृद्धि योजना और मातृ वंदना योजना जैसी योजनाओं ने महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में वर्ष 2026 को 'महतारी गौरव वर्ष' के रूप में मनाया जा रहा है। महतारी वंदन योजना के तहत 69 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता दी जा रही है और अब तक 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक वितरित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं में 57 प्रतिशत प्रतिनिधित्व महिलाओं का है और 96 हजार से अधिक महिलाएं जनप्रतिनिधि के रूप में कार्य कर रही हैं।
श्री साय ने कहा, "प्रधानमंत्री ने 16, 17 और 18 अप्रैल को संशोधन विधेयक संसद में प्रस्तुत किए थे, ताकि माताओं-बहनों को आने वाले लोकसभा चुनाव में 33 प्रतिशत आरक्षण मिल सके, लेकिन विपक्ष ने इसे पारित नहीं होने दिया। देश की महिलाओं को उम्मीद थी कि इस विशेष सत्र में यह विधेयक पास होगा और 2029 के चुनाव से उन्हें इसका लाभ मिलेगा।" उन्होंने जोर दिया कि मातृशक्ति के राजनीतिक सशक्तिकरण के इस प्रयास में सभी को सहयोग करना चाहिए।
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