देहरादून , अप्रैल 12 -- उत्तराखंड भारतीय जनता पार्टी की महिला इकाई ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को देश में लोकतंत्र का स्वर्णिम इतिहास सृजित करने वाला बताया है। रविवार को देहरादून स्थित पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में प्रदेश महामंत्री दीप्ति रावत ने सशक्तिकरण के लिए माता, बहिनों की तरफ से सभी पार्टियों से दलगत राजनीति से ऊपर उठते हुए संसद में अधिनियम के समर्थन का आग्रह किया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हुआ यह ऐतिहासिक कार्य देश की महिलाओं के विश्वास और आकांक्षाओं को नई दिशा और गति देगा। उन्होंने उम्मीद व्यक्त की कि महिला सांसदों का जो सफर 1952 में 5 फीसदी से शुरू होकर 7 दशकों बाद भी मात्र 14-15 फीसदी पहुंचा था, वहीं अब इस कानून के साथ 33 फीसदी के पार पहुंच जाएगा।

श्रीमती रावत ने कहा कि 16 अप्रैल को संसद के विशेष सत्र में प्रस्तुत होने जा रहा "नारी शक्ति वंदन अधिनियम" देश की महिलाओं के लिए ऐतिहासिक, क्रांतिकारी और दूरगामी प्रभाव वाला निर्णय है। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को समान अधिकार, सम्मान और अवसर प्रदान करने की दिशा में एक सशक्त संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के पारित होने से लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित होगा, जिससे महिलाएं अब केवल मतदाता या लाभार्थी नहीं, बल्कि नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया की सक्रिय भागीदार बनेंगी। उन्होंने कहा कि इससे देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और निर्णय अधिक संवेदनशील, संतुलित एवं जनहितकारी होंगे।

इस अवसर पर मौजूद महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष रुचि भट्ट ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बीते वर्षों में महिला सशक्तिकरण के लिए कार्यों का जिक्र करते हुए कहा, "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ", "उज्ज्वला योजना", "प्रधानमंत्री आवास योजना", "स्वयं सहायता समूहों के सशक्तिकरण" जैसे अनेक प्रयासों के माध्यम से महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से मजबूत बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम इन सभी प्रयासों को और अधिक सुदृढ़ करेगा और महिलाओं को नेतृत्व की मुख्य धारा में स्थापित करेगा।

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