कुशीनगर , अगस्त 28 -- नेपाल में ग्लेशियर फटने के बाद आई बाढ़ के बीच बड़ी गंडक (नारायणी) नदी के जलस्तर में तेजी से हो रही कमी को देखते हुए तमकुहीराज तहसील प्रशासन ने एपी बांध पर चौकसी बढ़ा दी है।
नरवाजोत से अहिरौली दान तक करीब 17.5 किलोमीटर लंबे तटबंध पर बाढ़ खंड के अभियंताओं के साथ राजस्व और पुलिस की टीमें भी अलर्ट मोड पर हैं। गुरुवार देर रात से ही संवेदनशील बिंदुओं पर अधिकारियों ने निगरानी शुरू कर दी है। गिरते जलस्तर के बीच नदी की तेज धार से तटबंधों पर कटान का खतरा बढ़ गया है।
प्रशासन के अनुसार, नरवाजोत, जवही और अहिरौली दान तटबंध पर फिलहाल कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है, लेकिन नदी के बहाव और दबाव को देखते हुए लगातार निगरानी की जा रही है। कुशीनगर के अपर जिलाधिकारी वैभव मिश्रा ने बताया कि नारायणी नदी के जलस्तर में लगातार गिरावट से जिले के खड्डा रेता क्षेत्र में फिलहाल बाढ़ का खतरा टल गया है। हालांकि, तटीय गांवों में सतर्कता और निगरानी बढ़ा दी गई है।
वाल्मीकिनगर गंडक बैराज के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बुधवार रात 8.30 बजे गंडक नदी का डिस्चार्ज 1.14 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया था। ऊपरी क्षेत्रों से पानी के दबाव के कारण रात नौ बजे यह बढ़कर 1.26 लाख 500 क्यूसेक हो गया। रात 9.30 बजे डिस्चार्ज 1.36 लाख 700 क्यूसेक, रात 10 बजे 1.42 लाख 100 क्यूसेक और रात 11 बजे बढ़कर 1.50 लाख 200 क्यूसेक पहुंच गया।
डिस्चार्ज 1.50 लाख क्यूसेक के पार पहुंचने के बाद बैराज और गंडक नदी के तटीय इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। हालांकि, गुरुवार से नारायणी नदी के जलस्तर में तेजी से गिरावट शुरू हो गई। शुक्रवार सुबह 10 बजे तक नदी का डिस्चार्ज घटकर 99 हजार 800 क्यूसेक रह गया। फिलहाल वाल्मीकिनगर बैराज के सभी फाटक खुले हैं, जिसके कारण नदी के जलस्तर में लगातार कमी हो रही है।
इसी बीच वाल्मीकिनगर बैराज और छितौनी बांध के आसपास नारायणी नदी की तेज धारा में घरेलू सामान बहकर आने से ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, नदी में कहीं सिलेंडर तो कहीं बेड, फ्रिज और घरों में इस्तेमाल होने वाली अन्य वस्तुएं बहती दिखाई दीं। नदी किनारे मौजूद ग्रामीणों ने इनमें से कुछ सामान को बाहर निकालकर सुरक्षित रखना शुरू कर दिया।
छितौनी और वाल्मीकिनगर बैराज क्षेत्र में तेज धारा के साथ घरेलू सामान बहकर आने की घटना ने नदी के जलप्रवाह की तीव्रता का संकेत दिया है। ग्रामीणों की नजर अब नारायणी के जलस्तर और नेपाल से आने वाले पानी पर टिकी हुई है। प्रशासन ने एहतियातन गांवों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात रखी हैं। इसके अलावा पीएसी और जल पुलिस के जवानों को भी निगरानी के लिए लगाया गया है। तटबंधों की सुरक्षा और संवेदनशील स्थानों पर संभावित कटान को देखते हुए प्रशासनिक और तकनीकी टीमें लगातार स्थिति पर नजर रख रही हैं।
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