रायपुर , जुलाई 21 -- छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में रेशम विकास एवं विस्तार योजनाओं के माध्यम से ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं और युवाओं के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित हुए हैं। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में संचालित मलबरी एवं टसर रेशम योजनाओं ने स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार जिले के नारायणपुर और कुसरतराई स्थित दो मलबरी केंद्रों में लगभग 22.5 एकड़ क्षेत्र में पौधारोपण विकसित किया गया है। यहां महिला स्व-सहायता समूहों के सदस्य उन्नत तकनीकों से रेशम कृमिपालन कर रहे हैं। वर्ष 2025-26 में 4,400 किलोग्राम ककून उत्पादन के लक्ष्य के मुकाबले 4,180 किलोग्राम उत्पादन दर्ज किया गया। इससे जुड़े 47 हितग्राहियों के बैंक खातों में 7.72 लाख रुपये से अधिक की राशि सीधे अंतरित की गई। पौधारोपण संरक्षण, निराई-गुड़ाई और कृमिपालन जैसी गतिविधियों से ग्रामीणों को वर्षभर रोजगार मिला।
इसी प्रकार जिले के नारायणपुर, कुसरतराई, गोटाजुन्हरी और एडका स्थित चार टसर केंद्रों के 62 हेक्टेयर क्षेत्र में संचालित टसर कृमिपालन योजना ने लक्ष्य से अधिक उत्पादन दर्ज किया। वर्ष 2025-26 में 8.52 लाख कोसाफल उत्पादन के लक्ष्य के विरुद्ध 9.73 लाख से अधिक कोसाफल का उत्पादन हुआ। इससे जुड़े 64 हितग्राहियों को लगभग 36.97 लाख रुपये की प्रत्यक्ष आय प्राप्त हुई।
रेशम विभाग द्वारा हितग्राहियों को तकनीकी प्रशिक्षण, रोग प्रबंधन तथा गुणवत्तापूर्ण ककून उत्पादन के लिए नियमित मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। उत्पादन का भुगतान सीधे बैंक खातों में किए जाने से पारदर्शिता और ग्रामीणों का विश्वास भी मजबूत हुआ है। स्व-सहायता समूहों की महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने परिवारों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
प्रशासन का मानना है कि स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, तकनीकी सहयोग और ग्रामीणों की सहभागिता से नारायणपुर में रेशम उत्पादन आत्मनिर्भरता का प्रभावी मॉडल बनकर उभरा है। आने वाले समय में योजनाओं के विस्तार से अधिक ग्रामीण परिवारों को लाभ मिलने और जिले को राज्य के प्रमुख रेशम उत्पादक क्षेत्रों में स्थापित करने की उम्मीद है।
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