नारायणपुर , जुलाई 11 -- छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में शनिवार को जिला स्तरीय मांझी, चालकी, गायता, पटेल एवं पुजारी सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें परंपरागत आदिवासी नेतृत्व की भूमिका, सांस्कृतिक संरक्षण और जिले के विकास से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत संवाद हुआ।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता तथा संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराएं और रीति-रिवाज अमूल्य धरोहर हैं, जिनका संरक्षण और संवर्धन वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मांझी, चालकी, गायता, पटेल और पुजारी जैसे परंपरागत नेतृत्व सामाजिक, धार्मिक और सामुदायिक व्यवस्था को सशक्त बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। शासन की विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में उनकी सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है।
श्री कश्यप ने कहा कि लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहे नारायणपुर में अब सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के साथ सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है। इस परिवर्तन को स्थायी बनाने में परंपरागत नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने जिले की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए देवी-देवताओं के पारंपरिक स्थलों का चिन्हांकन कर उनके संरक्षण की दिशा में सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।
सम्मेलन के दौरान परंपरागत जनप्रतिनिधियों के साथ जिले के विकास, सामाजिक एवं प्रशासनिक चुनौतियों, जनहित के मुद्दों तथा भविष्य की विकास योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। समाज प्रमुखों ने स्थानीय समस्याओं और विकास संबंधी सुझाव भी प्रशासन के समक्ष रखे। इस अवसर पर राजस्व, शिक्षा और शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई।
जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम ने परंपरागत नेतृत्व की भूमिका की सराहना करते हुए सामाजिक एकता और विकास में उनके योगदान को महत्वपूर्ण बताया।
कलेक्टर नम्रता जैन ने कहा कि जिले में संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। उन्होंने मांझी, चालकी, गायता, पटेल एवं पुजारियों से जिले के समग्र विकास में सक्रिय सहभागिता निभाने तथा अपने अनुभव और सुझाव प्रशासन के साथ साझा करने का आग्रह किया।
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