नारायणपुर , मई 14 -- छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के डमरतराई गांव में आधुनिकता और दिखावे के दौर के बीच भारतीय संस्कृति, सादगी और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा उदाहरण देखने को मिला। डमरतराई में बुधवार रात बैलगाड़ी से निकली बारात पूरे क्षेत्र में आकर्षण और चर्चा का केंद्र बनी रही।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इस पारंपरिक बारात में ग्रामीण परिवेश, ढोल-नगाड़ों, लोकगीतों और पारंपरिक वेशभूषा की झलक ने लोगों को अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़ने का संदेश दिया। बड़ी संख्या में ग्रामीण इस अनोखी बारात को देखने उमड़े और आयोजन की खुलकर सराहना की।

बारात की विशेष बात यह रही कि कुबेर देहारी स्वयं बैलगाड़ी पर सवार होकर दुल्हन के घर पहुंचे। पूरे आयोजन में सादगी, परंपरा और भारतीय संस्कारों की जीवंत झलक देखने को मिली।

इस अवसर पर नारायणपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी लगातार देशवासियों को ईंधन बचत, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय संस्कृति को अपनाने का संदेश दे रहे हैं, जिसका असर अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगा है।

उन्होंने कहा कि लोग अब अनावश्यक खर्च और दिखावे से दूर होकर अपनी परंपराओं और ग्रामीण संस्कृति को पुनः आत्मसात कर रहे हैं। डमरतराई में निकली बैलगाड़ी बारात इसी सोच का जीवंत उदाहरण है।

मंत्री कश्यप ने कहा कि भारतीय संस्कृति की पहचान उसकी सादगी, प्रकृति के प्रति सम्मान और समाज को साथ लेकर चलने की परंपरा में निहित है। ऐसे प्रयास न केवल ईंधन बचत को बढ़ावा देते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का कार्य भी करते हैं।

उन्होंने कहा कि जब समाज अपनी जड़ों से जुड़ता है, तभी वास्तविक विकास और सकारात्मक परिवर्तन संभव होता है। डमरतराई की यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है।

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