विजयवाड़ा , नवंबर 01 -- आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने शनिवार को मोंथा चक्रवात के दौरान जान-माल की हानि को रोकने के लिए अनुकरणीय सेवाएं प्रदान करने वाले लोगों को सम्मानित किया और स्मृति चिन्ह भेंट किए।
श्री नायडू ने चक्रवात मोंथा नायकों के नाम पर यहाँ के निकट उंडावल्ली स्थित शिविर कार्यालय में आयोजित सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए इस बात पर प्रकाश डाला कि राज्य सरकार ने अग्रिम निगरानी, सतर्कता तंत्र, बचाव और पुनर्वास तथा सामान्य स्थिति बहाल करने सहित पाँच सिद्धांतों के आधार पर चक्रवात की चुनौती का सफलतापूर्वक सामना किया।
उन्होंने कहा कि पहली बार प्रौद्योगिकी और टीम भावना का उपयोग करके प्रशासन चक्रवात की चुनौती का सामना करने और संपत्ति के नुकसान को कम करने में सक्षम रहा। उन्होंने यह भी कहा कि चक्रवात की निगरानी एवं प्रबंधन के लिए आरटीजीएस में तकनीकी विशेषज्ञता वाली युवा टीमों की सेवाओं का उपयोग किया गया तथा प्रशासन, प्रौद्योगिकी और जनप्रतिनिधियों की सेवाओं के एकीकरण से अद्भुत परिणाम मिले हैं।
मुख्यमंत्री ने अतीत में आए कई चक्रवातों की चुनौतियों को याद करते हुए कहा कि इस बार तकनीक का उपयोग करके चक्रवात से निपटने और सामान्य स्थिति बहाल करने के तरीके से वे अधिक संतुष्ट हैं। उन्होंने बताया, "सचिवालय में डेटा-लेक और आरटीजीएस के अवेयर 2.0 प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करके, लोगों और ग्राम सचिवालयों को अंतिम समय में ही चक्रवात की चेतावनी भेज दी गई। आरटीजीएस से ही दूरस्थ ग्राम सचिवालय में अग्रिम चेतावनी की घोषणा करने के लिए एक प्रणाली विकसित की गई।"मुख्यमंत्री ने बताया कि ड्रोन की सेवाओं का भी उपयोग किया गया और परचुरु निवासी एस.के. मुन्ना को बाढ़ की धारा में बहते हुए बचाया गया और ड्रोन सेवाओं का उपयोग करके एक धार्मिक स्थल से 15 लोगों को भी बचाया गया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के कुशल कार्य से सही समय पर सही निर्णय लिए गए और मोंथा चक्रवात से निपटने की प्रक्रिया का दस्तावेजीकरण करके इसे एक केस स्टडी के रूप में लिया जाना चाहिए।
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