नयी दिल्ली , अप्रैल 23 -- नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने गुरुवार को दिल्ली हवाई अड्डे पर हब-एंड-स्पोक संचालन के कार्यान्वयन की तैयारियों की समीक्षा की।
सरकार ने दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता और चेन्नई जैसे शहरों को वैश्विक हब के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा है ताकि भारत विदेशी विमान सेवा कंपनियों के लिए अंतिम गंतव्य की बजाय एक हब के रूप में विकसित हो सके। साथ ही देश के छोटे हवाई अड्डों को इन हब एयरपोर्ट के साथ स्पोक की तरह जोड़ने की भी योजना है।
मंत्री ने दिल्ली हवाई अड्डे पर सभी प्रमुख हितधारकों के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में नागरिक उड्डयन सचिव सहित गृह मंत्रालय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय, ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन, नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो, कस्टम्स, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, नागर विमानन महानिदेशालय, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, डिजीयात्रा, दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड और प्रमुख विमान सेवा कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
मंत्री ने यात्री प्रवाह प्रणाली का निरीक्षण करने के लिए दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 के सुरक्षा होल्ड क्षेत्र का निरीक्षण किया।
देश को हवाई यात्रा का हब बनाने के प्रयासों में विदेशी विमान सेवा कंपनियों को पॉइंट्स ऑफ कॉल देने में संतुलित दृष्टिकोण अपनाने, द्विपक्षीय समझौतों को नये सिरे से तय कर भारतीय एयरलाइनों को मजबूती देने और घरेलू कोड-शेयर व्यवस्था को उदार बनाने की रणनीति शामिल है।
श्री नायडू ने अधिकारियों से कहा कि भारत की भौगोलिक स्थिति पूर्व और पश्चिम के बीच होने के कारण इसमें एक वैश्विक ट्रांजिट हब बनने की पूरी संभावना है।
मंत्री ने बताया कि हब-एंड-स्पोक मॉडल से छोटे और मझौले शहरों के हवाई अड्डों को अंतर्राष्ट्रीय गंतव्यों से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे यात्रियों का समय बचेगा और देश में विकसित बुनियादी ढांचे का बेहतर उपयोग होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लगभग 35 प्रतिशत अंतर्राष्ट्रीय यात्री दुबई, लंदन और सिंगापुर जैसे विदेशी हब के माध्यम से यात्रा करते हैं, जिसे बदलने का लक्ष्य है।
दिल्ली हवाई अड्डे का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इसकी क्षमता प्रति वर्ष 10 करोड़ से अधिक यात्रियों की है और यह उत्तरी क्षेत्र के लगभग 50 प्रतिशत यात्री यातायात को संभालता है, जिससे यह एक नैसर्गिक हब बनता है।
इस रणनीति में कार्गो क्षेत्र को भी मजबूत करने पर जोर दिया गया है। ट्रांसशिपमेंट कार्गो के लिए पुनः जांच की आवश्यकता समाप्त करने और प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण से दक्षता बढ़ेगी और समय की बचत होगी।
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