गौरेला-पेंड्रा-मरवाही , मार्च 17 -- छत्तीसगढ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में नाबालिग किशोर के साथ कुकर्म कर उसका वीडियो बनाने के गंभीर मामले में पेंड्रारोड स्थित विशेष अपर सत्र न्यायालय ने दो आरोपियों को मंगलवार को दोषी करार देते हुए उन्हें 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई और 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
विशेष न्यायाधीश ज्योति अग्रवाल की अदालत ने सुनवाई के बाद कोरबा निवासी आदेश उर्फ अंशु जॉन और बलौदाबाजार निवासी विकास मसीह उर्फ लाली को पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया। न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह का अपराध अत्यंत गंभीर है, जिसका पीड़ित के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है।
यह प्रकरण पिछले साल 21 अप्रैल की रात का है। पीड़ित किशोर अपने परिचित के घर जा रहा था, इसी दौरान आरोपियों ने उसे रास्ते में रोक लिया। उसे जबरन मोटरसाइकिल पर बैठाकर सुमन निकेतन चर्च के पीछे स्थित सुनसान इलाके में ले जाया गया, जहां उसके साथ कुकर्म किया गया। आरोपियों ने इस घटना का वीडियो भी बनाया और उसे जान से मारने की धमकी देकर छोड़ दिया।
पुलिस कार्रवाई और फैसला पीड़ित की शिकायत पर गौरेला थाना में मामला दर्ज किया गया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने पॉक्सो अधिनियम सहित अन्य धाराओं में आरोप सिद्ध मानते हुए सजा सुनाई। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अदालत ने पीड़ित के हित में आदेश देते हुए अर्थदंड की राशि पीड़ित के इलाज और पुनर्वास के लिए उपयोग करने के निर्देश दिए हैं। जुर्माना नहीं भरने की स्थिति में दोषियों को अतिरिक्त तीन माह का सश्रम कारावास भुगतना होगा।
इस प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक कौशल सिंह ने प्रभावी पैरवी की। उल्लेखनीय है कि अदालत ने घटना के करीब 11 महीने के भीतर फैसला सुनाकर त्वरित न्याय का उदाहरण पेश किया है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित