जयपुर , जनवरी 19 -- राजस्थान उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि कोई महिला वैधानिक रूप से मृतक सरकारी कर्मचारी की पत्नी है, तो उसे पारिवारिक पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता, भले ही वह दूसरी पत्नी ही क्यों न हो।
अदालत ने यह भी माना कि राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित नाता विवाह को, यदि वह समुदाय की मान्य परंपराओं के अनुसार संपन्न हुआ हो, तो वह विवाह के रूप में कानूनी मान्यता प्राप्त है।
यह ऐतिहासिक फैसला न्यायाधीश अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता राम प्यारी सुमन की याचिका पर सोमवार को सुनाया। याचिका में राम प्यारी सुमन ने स्वयं को दिवंगत सरकारी कर्मचारी पूरन लाल सैनी की पत्नी बताते हुए पारिवारिक पेंशन और उसके बकाया भुगतान की मांग की थी। पूरन लाल सैनी राज्य सरकार में पटवारी पद पर कार्यरत थे और सेवानिवृत्ति के बाद 20 दिसंबर 2020 को उनका निधन हो गया था।
याचिकाकर्ता ने बताया कि मृतक की पहली पत्नी के निधन के बाद उनका नाता विवाह हुआ था और इस दांपत्य संबंध से एक पुत्री भी जन्मी। वैवाहिक विवाद के चलते उन्होंने पारिवारिक न्यायालय में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत भरण-पोषण का मामला दायर किया था, जिसे स्वीकार करते हुए न्यायालय ने भरण-पोषण का आदेश दिया। बाद में धारा 127 के तहत भरण-पोषण वृद्धि के मामले में स्वयं पूरन लाल सैनी ने अदालत में गवाही देते हुए याचिकाकर्ता को अपनी पत्नी स्वीकार किया।
राज्य सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि सेवा रिकॉर्ड में याचिकाकर्ता का नाम दर्ज नहीं था और नाता विवाह को विधिवत विवाह नहीं माना जा सकता। हालांकि, उच्च न्यायालय ने पारिवारिक न्यायालय के 14 फरवरी 2017 के आदेश और मृतक कर्मचारी की न्यायिक स्वीकारोक्ति को निर्णायक साक्ष्य माना।
अदालत ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा सात के अनुसार समुदाय की परंपराओं से संपन्न विवाह वैध हो सकता है और नाता विवाह भी इसी श्रेणी में आता है। साथ ही राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996 के नियम 66 का हवाला देते हुए कहा कि केवल नामांकन न होने के आधार पर वैध पत्नी को पारिवारिक पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता।
अंततः उच्च न्यायालय ने याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता राम प्यारी सुमन को मृतक कर्मचारी की पत्नी मानते हुए पारिवारिक पेंशन और समस्त वैधानिक लाभ शीघ्र प्रदान किए जाएं।
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