दरभंगा , मई 12 -- बिहार के प्रतिष्ठित वरिष्ठ रंगकर्मी हेमेंद्र कुमार लाभ ने कहा कि नाट्य प्रस्तुति में उच्चारण और वॉयस मॉड्यूलेशन की अहम भूमिका है।

श्री लाभ ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के विश्वविद्यालय संगीत एवं नाट्य विभाग में आयोजित "नाट्यकला की मूलभूत बारीकियां, उच्चारण एवं स्वर के उतार-चढ़ाव" विषयक विशेष सोदाहरण-व्याख्यान को संबोधित करते हुये कहा कि वॉयस मॉड्यूलेशन, शुद्ध उच्चारण और पात्रानुकूल क्षेत्रीय बोली नाट्य प्रस्तुति की आत्मा हैं। उन्होंने कहा कि एक प्रभावशाली कलाकार के लिए संवाद-अभिव्यक्ति की सशक्त क्षमता अत्यंत आवश्यक होती है।

अपने व्याख्यान में हेमेंद्र कुमार लाभ ने संगीत और नाट्य को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए विद्यार्थियों से दोनों विधाओं के समन्वय के माध्यम से अपनी रचनात्मकता और प्रस्तुति क्षमता विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने नाट्यकला के विकासक्रम पर विस्तार से चर्चा करते हुए भारतेंदु युग, प्रसाद युग और आधुनिक युग के नाटकों की विशेषताओं को रेखांकित किया।उन्होंने 'अंधेर नगरी', 'अंधा युग' और 'आषाढ़ का एक दिन' जैसे महत्वपूर्ण नाटकों का उल्लेख करते हुए इन्हें पाठ्यक्रम की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। साथ ही पारसी रंगमंच, संस्कृत रंगमंच तथा भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) की परंपरा और योगदान से विद्यार्थियों को अवगत कराया।

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