वॉशिंगटन , अप्रैल 11 -- अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने संकेत दिया है कि चीन आने वाले हफ्तों में ईरान को नयी वायु रक्षा प्रणाली की आपूर्ति की तैयारी कर रहा है।

सीएनएन ने यह जानकारी खुफिया आकलनों से परिचित सूत्रों के हवाले से दी है। रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग इन हथियारों की आपूर्ति को छिपाने के लिए तीसरे देशों के जरिए भेजने की कोशिश कर सकता है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले महीने चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं, जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति शी जिनपिंग से प्रस्तावित है।

ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी है कि ईरान को सैन्य हथियार आपूर्ति करने वाले देशों के आयात पर 50 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाया जाएगा, जिसमें कोई छूट नहीं होगी। हालांकि, उन्होंने इसके लिए कानूनी आधार स्पष्ट नहीं किया है, खासकर तब जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट फरवरी में अंतरराष्ट्रीय आपात आर्थिक शक्तियां अधिनियम के तहत व्यापक टैरिफ लगाने के उनके अधिकार को खारिज कर चुका है।

इस बीच, श्री ट्रंप ने द न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि यदि वार्ता विफल होती है, तो अमेरिकी युद्धपोतों को फिर से हमले के लिए तैयार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, "हम जल्द ही जान जाएंगे कि वार्ता सफल होती है या नहीं। हमने जहाजों को सबसे उन्नत हथियारों से लैस करना शुरू कर दिया है।"यह बयान ऐसे समय आया है, जब उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस्लामाबाद में चल रही शांति वार्ता में शामिल होने पहुंचे हैं, जहां उनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर भी मौजूद हैं।

सीएनएन की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिकी खुफिया आकलनों के अनुसार, ईरान युद्धविराम के दौरान अपने हथियार तंत्र को मजबूत करने के लिए विदेशी साझेदारों की मदद ले सकता है।

हालिया संघर्ष के दौरान ईरान ने सात अरब देशों को निशाना बनाते हुए हजारों मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे। अमेरिका और ईरान के बीच सात अप्रैल को घोषित दो सप्ताह का युद्धविराम पाकिस्तान की मध्यस्थता से संभव हुआ था।

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