वाराणसी , मार्च 12 -- वाराणसी के समग्र विकास, पर्यावरणीय स्थिरता और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए वाराणसी नगर निगम और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। शहर के नियोजित विकास को लेकर दोनों संस्थाओं के बीच सहमति बन गई है। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल और बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में दोनों संस्थानों के बीच जल्द ही एक औपचारिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने पर सहमति बनी। इस साझेदारी के तहत शैक्षणिक समन्वय को भी बढ़ावा दिया जाएगा। हर वर्ष विश्वविद्यालय के 50 छात्रों को नगर निगम में इंटर्नशिप का अवसर मिलेगा, जिससे वे शहरी नियोजन और सामाजिक उद्यमिता से जुड़ी बारीकियों को सीख सकेंगे। इसके अलावा बीएचयू के बाहरी क्षेत्रों जैसे मालवीय गेट से डाफी कॉरिडोर तक के सौंदर्यीकरण और कंदवा क्षेत्र में जलभराव रोकने के लिए नई जल निकासी लाइन बिछाने का कार्य प्राथमिकता पर किया जाएगा।

विश्वविद्यालय परिसर के भीतर स्वच्छता प्रबंधन और निराश्रित पशुओं के नियंत्रण के लिए भी नगर निगम अपनी सेवाएं उपलब्ध कराएगा, जिससे हजारों छात्रों और कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा।

निगम द्वारा डोमरी क्षेत्र में विकसित किए जा रहे शहर के सबसे बड़े मियावाकी अर्बन फॉरेस्ट (शहरी वन) के रखरखाव में भी बीएचयू के वनस्पति वैज्ञानिक सहयोग करेंगे। वैज्ञानिक दल समय-समय पर निरीक्षण कर पौधों के विकास के लिए तकनीकी सुझाव देगा। यह पहल शहरी वनीकरण के एक मॉडल के रूप में सामने आ सकती है और शहर में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने में मददगार होगी।

बैठक के दौरान नगर निगम और बीएचयू के बीच लंबे समय से संपत्ति कर को लेकर चल रहा विवाद भी समाप्त हो गया। नगर निगम ने विश्वविद्यालय को कुछ पुरानी देनदारियों में रियायत दी है, जिसके बदले बीएचयू ने शेष बकाया राशि किस्तों में चुकाने पर सहमति जताई।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित