नयी दिल्ली , अप्रैल 29 -- जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा है कि जल जीवन मिशन केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य, सम्मान और जीवन गुणवत्ता में सुधार लाने वाला अनूठा एवं महत्वपूर्ण अभियान है।

श्री पाटिल ने बुधवार को जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जल जीवन मिशन 2.0 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उत्तराखंड, कर्नाटक और त्रिपुरा राज्यों के साथ सुधार-आधारित समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर के दौरान यह बात कही। उन्होंने राज्यों से मिशन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने का आग्रह किया।

ये समझौते केंद्र सरकार द्वारा गत 10 मार्च को जल जीवन मिशन 2.0 को मंजूरी दिए जाने के बाद किए गए हैं।समझौतों पर श्री पाटिल तथा राज्य मंत्री वी. सोमन्ना की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। इस कार्यक्रम में संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने वर्चुअल माध्यम से भाग लिया।

मंत्रालय के अनुसार इन समझौतों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार को निर्धारित मात्रा और गुणवत्ता के साथ नियमित पेयजल उपलब्ध कराना है। इसके तहत ग्राम पंचायत आधारित, सेवा-केंद्रित और समुदाय सहभागिता पर आधारित व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे जलापूर्ति प्रणालियों का स्थायी संचालन और रखरखाव सुनिश्चित हो सके।

उत्तराखंड के साथ समझौता मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में हुआ, जहां राज्य ने 98 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराने की उपलब्धि हासिल की है। कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की मौजूदगी में समझौता हुआ, जहां अब तक लगभग 87 प्रतिशत प्रगति दर्ज की गई है। वहीं त्रिपुरा में मुख्यमंत्री माणिक साहा की उपस्थिति में समझौता संपन्न हुआ, जहां 'हर घर जल' योजना के तहत 86 प्रतिशत कवरेज प्राप्त किया गया है।

मंत्रालय ने बताया कि इन समझौतों से जलापूर्ति प्रणालियों के संचालन और रखरखाव को सुदृढ़ किया जाएगा तथा ग्राम पंचायतों को जल प्रबंधन में अधिक जिम्मेदारी दी जाएगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार और दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

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