नयी दिल्ली , जनवरी 13 -- वित्तीय सेवा सचिव एम नागराजू ने मंगलवार को सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों के साथ उनके कार्य प्रदर्शन की समीक्षा की जिसमें इन कंपनियों की लाभप्रदता, डिजिटल ऑनबोर्डिंग और ग्राहक-केंद्रित सुधारों पर ज़ोर दिया गया।

वित्त मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार समीक्षा बैठक में श्री नागराजू ने ग्राहकों को कुशल सेवाएँ प्रदान करने के लिए सार्वजनिक शिकायतों के समय पर समाधान और निर्बाध और त्वरित दावों के प्रसंस्करण को सुनिश्चित करने पर ज़ोर दिया। बैठक में कंपनियों के वर्ष 2024-25 और 2025-26 की पहले छमाही के वित्तीय और व्यावसायिक प्रदर्शन की समीक्षा की गयी ।

बैठक में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी), भारतीय सामान्य बीमा निगम (जीआईसी), न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (एनआईएसीएल), नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (एनआईसीएल), यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (यूआईआईसीएल), ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (ओआईसीएल) और एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (एआईसीआईएल) शामिल के प्रतिनिधि शामिल थे।

श्री नागराजू ने ज़ोर दिया कि सावर्जनिक बीमा कंपनियों को लाभदायक व्यवसाय बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए और बाज़ार हिस्सेदारी बनाए रखते हुए और अपने खुदरा पोर्टफोलियो को लगातार मज़बूत करते हुए नुकसान अनुपात को कम करने के लिए रणनीतियाँ बनानी चाहिए। उन्होंने युवा पीढ़ी की ज़रूरतों को पूरा करने और उभरते जोखिमों के लिए कवरेज प्रदान करने के लिए नए और अभिनव अनुकूलित उत्पादों को विकसित करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। प्रौद्योगिकी को अपनाने और पूर्ण डिजिटलीकरण की ओर बढ़ने पर भी ज़ोर दिया गया, जिसका उद्देश्य डिजिटल चैनलों के माध्यम से खुदरा उत्पादों की 100 प्रतिशत ऑनबोर्डिंग हासिल करना है।

वित्तीय सेवा सचिव ने कंपनियों को सोशल मीडिया सहित विभिन्न प्लेटफार्मों के माध्यम से ब्रांड दृश्यता में सुधार के लिए संचार, प्रचार और जनसम्पर्क आउटरीच को बढ़ाने के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने एलआईसी की कुछ पहलों के प्रयासों की सराहना करते हुए, सचिव ने लाभप्रदता की दिशा में उसकी प्रगति और पूरे देश में, विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बीमा सखी पहल के विस्तार में उसकी सफलता पर ध्यान दिया। उन्होंने इस साल 10,000 करोड़ रुपये के प्रीमियम का मील का पत्थर पार करने के लिए एआईसीआईएल की भी सराहना की।

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