नागपुर , अगस्त 24 -- महाराष्ट्र के नागपुर जिले में एक जल शोधन संयंत्र में क्लोरीन गैस के रिसाव के बाद सोमवार को 56 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
घटना की जानकारी मिलने के बाद जिला प्रशासन, स्वास्थ्य अधिकारियों और आपदा प्रबंधन दलों ने बड़े स्तर पर आपातकालीन अभियान चलाया।
अधिकारियों ने बताया कि घटना रात करीब एक बजे गोधनी जल शुद्धीकरण संयंत्र में हुई। संयंत्र में लगाए गए दो गैस सिलेंडरों में से एक से क्लोरीन गैस का रिसाव शुरू हो गया। प्रभावित सिलेंडर की क्षमता 900 किलोग्राम थी।
रिसाव तेजी से आसपास के रिहायशी इलाकों में फैल गया, जिससे लोगों में घबराहट होने लगी। कई लोगों ने सांस लेने में परेशानी, खांसी और जलन की शिकायत की, जबकि कई लोग सुरक्षित स्थान की तलाश में अपने घरों से बाहर निकल आए।
घटना की जानकारी मिलने के बाद जिला कलेक्टर कुमार आशीर्वाद ने तुरंत आपातकालीन एजेंसियों को सक्रिय किया। स्थिति को नियंत्रित करने और प्रभावित लोगों की मदद के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), स्वास्थ्य सेवा निदेशालय, औद्योगिक सुरक्षा अधिकारियों, दमकल विभाग और चिकित्सा विभाग की टीमों को मौके पर भेजा गया।
गैस के संपर्क में आने के बाद कुल 56 लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया। इनमें से 11 लोगों की हालत स्थिर होने के बाद इलाज करके उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी।
बाकी 45 लोगों का इलाज जारी है। इनमें आठ मरीजों को गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में निगरानी में रखा गया है।
गैस रिसाव को रोकने के अभियान के तहत सिलेंडर को पानी में डुबो दिया गया। इसके बाद गैस को निष्क्रिय करने के लिए उसे पानी और कास्टिक सोडा से भरी टंकी में रखा गया।
अधिकारियों ने पुष्टि की कि गैस के रिसाव पर सफलतापूर्वक नियंत्रण पा लिया गया है और तत्काल खतरा समाप्त हो गया है।
पुलिस ने एहतियात के तौर पर संयंत्र के 200 मीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को बाहर निकाल दिया और प्रभावित क्षेत्र में लोगों के आने-जाने पर रोक लगा दी।
आसपास की बस्तियों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। वहीं, जिन लोगों में गैस के संपर्क में आने के लक्षण दिखाई दिए, उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया।
सूचना मिलने के तुरंत बाद दमकलकर्मी पानी के टैंकरों और सांस लेने के उपकरणों के साथ मौके पर पहुंच गए। नागपुर की पेयजल आपूर्ति व्यवस्था का प्रबंधन करने वाली ऑरेंज सिटी वाटर प्राइवेट लिमिटेड (ओसीडब्ल्यू) के कर्मचारी भी एनडीआरएफ के विशेषज्ञों के साथ राहत और बचाव अभियान में शामिल हुए।
अधिकारियों ने कहा कि आपातकालीन राहत दलों, चिकित्सा टीमों और जिला प्रशासन के समन्वित प्रयासों से स्थिति को और गंभीर होने से रोकने में मदद मिली।
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