बेंगलुरु , अगस्त 10 -- कर्नाटक सरकार बेंगलुरु-मैसूर अवसंरचना गलियारा (नाइस रोड) परियोजना को लेकर उलझन में है क्योंकि इससे लगभग 23,000 एकड़ जमीन और किसानों के लंबे समय से लंबित मुआवजे और दावों का विवाद जुड़ा हुआ है।
परियोजना की जांच करने वाली सरकारी सब-कमेटी के प्रमुख गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने सोमवार को समस्या की गंभीरता को माना। उन्होंने कहा कि सरकार अभी भी यह आकलन कर रही है कि अधिग्रहित जमीन में से कितनी असल में इस्तेमाल हुई है और कितनी वापस करनी पड़ सकती है तथा मूल समझौते के कानूनी दायरे में क्या किया जा सकता है।
उनकी बातों से सरकार के सामने मौजूद मुश्किल साफ होती है। इतने सालों बाद परियोजनाको रद्द करने से नयी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं, जबकि इसे पूरा करने के लिए जमीन, मुआवजे और संविदा से जुड़े कई मुद्दों को सुलझाना जरूरी है। डॉ. परमेश्वर ने कहा, "सिर्फ दो ही विकल्प हैं या तो परियोजना छोड़ दें या इसे पूरा करें। इतने सालों बाद इसे छोड़ने का क्या मकसद होगा? इससे एक और उलझन पैदा होगी।" उन्होंने कहा कि इसकी बजाय सरकार यह देख रही है कि पुराने समझौते और कानूनी दायरे के मुताबिक परियोजना को कैसे पूरा किया जा सकता है।
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