चंडीगढ़ , अगस्त 25 -- पंजाब सरकार के 'युद्ध नशे के विरुद्ध' अभियान के तहत संचालित हार्म रिडक्शन सेवाएं नशा मुक्ति की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

स्वास्थ्य विभाग के 547 आउट पेशेंट ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट (ओट ) केंद्रों और पंजाब स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी के 47 ओपिओइड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी केंद्रों के माध्यम से नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों को उपचार और आवश्यक सहायता उपलब्ध करायी जा रही है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने मंगलवार को कहा कि सरकार की हार्म रिडक्शन रणनीति में सहानुभूति, उपचार और प्रभावित लोगों का सम्मानजनक पुनर्वास प्रमुख आधार हैं। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या से प्रभावित लोगों को कलंकित करने के बजाय उन्हें उपचार, कौशल और मुख्यधारा में सम्मानजनक ढंग से वापस लाने की आवश्यकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हार्म रिडक्शन में नशीली दवाओं के इस्तेमाल से जुड़े स्वास्थ्य और सामाजिक नुकसान को कम करने के लिए विभिन्न उपाय शामिल हैं। इससे एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और सी जैसे रक्त से फैलने वाले संक्रमणों के जोखिम को कम करने, ओवरडोज से होने वाली मौतों में कमी लाने तथा सामाजिक बहिष्कार को दूर करने में मदद मिल सकती है।

राज्य के 500 से अधिक ओट केंद्रों में मरीजों को परामर्श के साथ चिकित्सकीय निगरानी में दवाएं उपलब्ध करायी जाती हैं। सरकारी मनोचिकित्सक के परामर्श से ओपिओइड यूज डिसऑर्डर के उपचार के लिए बुप्रेनॉर्फिन अथवा बुप्रेनॉर्फिन-नालोक्सोन का इस्तेमाल किया जाता है।

मरीज निर्धारित खुराक लेने के लिए नियमित रूप से ओट केंद्रों पर आते हैं। निर्धारित मानदंड पूरे करने वाले मरीजों को निश्चित अवधि के लिए घर पर दवा लेने की सुविधा भी दी जाती है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, (एम्स) दिल्ली के नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर के प्रोफेसर डॉ अतुल अंबेकर के अनुसार, ओपिओइड सब्स्टीट्यूशन ट्रीटमेंट अथवा ओपिओइड एगोनिस्ट ट्रीटमेंट लंबे समय तक ओपिओइड निर्भरता के उपचार की प्रमुख रणनीतियों में शामिल है। उन्होंने कहा कि रोजाना दवा लेने को 'एक नशे की जगह दूसरा नशा' समझना सही नहीं है, क्योंकि कई स्वास्थ्य स्थितियों में मरीजों को लंबे समय तक नियमित दवा की आवश्यकता होती है।

कार्यक्रम के तहत नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में लोगों को जागरूक किया जा रहा है और उन्हें उपचार के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जो लोग अभी भी इंजेक्शन के माध्यम से नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं, उन्हें इस्तेमाल की गई सीरिंज दोबारा न इस्तेमाल करने और सुरक्षित इंजेक्शन प्रथाओं के बारे में परामर्श दिया जाता है, ताकि एचआईवी तथा हेपेटाइटिस जैसे संक्रमणों का खतरा कम किया जा सके।

पंजाब सरकार ने उपचार के विकल्पों का विस्तार करते हुए लिक्विड मेथाडोन आधारित उपचार की सुविधा भी बढ़ायी है। वर्तमान में फरीदकोट, लुधियाना, पटियाला, गुरदासपुर, मोहाली और जालंधर में छह समर्पित मेथाडोन क्लीनिक संचालित हैं। इसके अलावा छह और मेथाडोन मेंटेनेंस ट्रीटमेंट केंद्र स्थापित किये जा रहे हैं, जिससे ऐसे समर्पित केंद्रों की कुल संख्या 12 हो जाएगी।

डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन और राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप मेथाडोन मेंटेनेंस थेरेपी लंबे समय से ओपिओइड निर्भरता से जूझ रहे लोगों के लिए प्रभावी उपचार विकल्प है। उन्होंने कहा कि व्यापक उपचार व्यवस्था से मरीजों के ठीक होने के बेहतर परिणाम मिलेंगे और उन्हें परिवार तथा समाज में सफलतापूर्वक पुनः शामिल करने में मदद मिलेगी।

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