तरनतारन , सितंबर 15 -- अकाली नेता ब्रह्मपुरा ने शिरोमणि अकाली दल से प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किये जाने के बाद पार्टी के मौजूदा नेतृत्व पर नशा तस्करों और आपराधिक माफिया के सामने 'सैद्धांतिक आत्मसमर्पण' कर दिये जाने का आरोप लगाया है।

श्री ब्रह्मपुरा ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि बड़ी राजनीतिक संस्थाओं और दलों का पतन उनके विरोधियों से नहीं, बल्कि नेतृत्व के आंतरिक खोखलेपन, दूरदर्शिता की कमी और नैतिक दिवालियेपन से होता है। उन्होंने दावा किया कि उनकी सदस्यता समाप्त करने का आदेश उनके खिलाफ कार्रवाई से अधिक वर्तमान नेतृत्व की नीतियों का आधिकारिक ऐलान है। उन्होंने आरोप लगाया कि 'अनुशासन' के नाम पर उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया गया, जबकि वह कथित तौर पर नशा तस्करी और आपराधिक गतिविधियों से जुड़े मामलों को सार्वजनिक कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नेतृत्व सच्चाई का सामना करने के बजाय अपना बचा-खुचा राजनीतिक सम्मान माफिया के पास गिरवी रखने की राह पर चल रहा है।

अकाली दल की स्थापना और पुराने नेताओं के संघर्ष का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी की नींव दशकों के निस्वार्थ संघर्ष, जेल यात्राओं और पंथक परंपराओं पर रखी गयी थी, लेकिन मौजूदा नेतृत्व अपने फैसलों से उसी नींव को कमजोर कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को राजनीतिक मंचों पर जगह देना और पारंपरिक अकाली सोच रखने वालों को किनारे करना पार्टी के मूल स्वरूप के लिए नुकसानदेह है। उन्होंने कहा कि 'जड़ों को काटकर पत्तों को हरा रखने' की नीति राजनीतिक दूरदर्शिता की कमी का संकेत है।

श्री ब्रह्मपुरा ने कहा कि उनका राजनीतिक अस्तित्व किसी कागजी आदेश या कार्यालयी परिपत्र पर निर्भर नहीं है। उनके अनुसार, पार्टी से निष्कासन ने उन्हें उन संगठनात्मक बंधनों से मुक्त कर दिया है जो नशा तस्करों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई में बाधा बन रहे थे। उन्होंने कहा कि कागजी आदेशों से पुलिस रिकॉर्ड, अदालतों के फैसलों और इतिहास में दर्ज तथ्यों को मिटाया नहीं जा सकता। उन्होंने दावा किया कि माफिया और उनके कथित राजनीतिक संरक्षण के गठजोड़ को उजागर करने की उनकी रणनीति अब और अधिक स्पष्ट तथा निर्णायक तरीके से आगे बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि जब राजनीति माताओं के बच्चों को नशे से बर्बाद करने वालों के सामने घुटने टेक दे तो उसके खिलाफ आवाज उठाना केवल अधिकार नहीं, बल्कि उनका कर्तव्य बन जाता है।

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