पटना , नवंबर 02 -- माज कल्याण विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल ने सोमवार को कहा कि प्रदेश में नशामुक्ति अभियान को प्रभावी बनाने के साथ नशे की लत से उबर रहे युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बड़ी कवायद शुरू की जा रही है, जिसके तहत नशामुक्ति केंद्रों में इलाज करा रहे लोगों खासकर युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और आजीविका के अवसरों से जोड़ा जाएगा।श्री गुंजियाल ने समाज कल्याण विभाग के सामाजिक सुरक्षा निदेशालय की ओर से आयोजित राज्यस्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि नशामुक्ति केंद्रों में प्रशिक्षित काउंसलर, चिकित्सक और अन्य जरूरी सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे उपचार के बाद इन युवाओं का बेहतर तरीके से पुनर्वास हो सके और वे दोबारा नशे की गिरफ्त में न जाएं। इसके लिए समाज कल्याण विभाग एक विशेष कार्ययोजना को जल्द मूर्तरूप देगा।
कार्यशाला में नशामुक्त भारत अभियान, दिव्यांगजनों के कल्याण एवं दिव्यांगता के क्षेत्र में शुरुआती हस्तक्षेप तथा विकसित भारत के लिए सुगम्य भारत अभियान जैसे तीन महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्यभर में 9,527 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनके माध्यम से 08 लाख 46 हजार 177 लोगों तक नशामुक्ति का संदेश पहुंचाया गया।
श्री गुंजियाल ने कहा कि राज्य में संचालित 13 नशामुक्ति केंद्रों की गुणवत्ता, उपचार व्यवस्था और उपलब्ध सुविधाओं की नियमित निगरानी की जाएगी।उन्होंने बताया कि कार्यशाला में विभिन्न विभागों और विशेषज्ञों से प्राप्त सुझावों को राष्ट्रीय कार्यशाला में प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन को और प्रभावी बनाया जा सके।
दिव्यांग बच्चों की समय रहते पहचान और उपचार के लिए राज्य के 101 बुनियाद केंद्रों पर स्वास्थ्य स्थितियों की स्क्रीनिंग शुरू करने की तैयारी है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत फिलहाल राज्य के नौ प्रमंडलों में जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र संचालित हैं। यहां 44 प्रकार की स्वास्थ्य स्थितियों की स्क्रीनिंग की जाती है। अब इस व्यवस्था का विस्तार बुनियाद केंद्रों तक करने की योजना है।
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